केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के तौर पर संस्कृत को लागू कराने में जुटी केंद्र सरकार ने इस वर्ष छात्रों को संस्कृत की परीक्षा से मुक्त रखा है। केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस सत्र में संस्कृत की परीक्षा नहीं देनी होगी।
इस पहल से जर्मन को हटा संस्कृत भाषा लाने को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थम सकता है। इस निर्णय से केंद्रीय विद्यालयों में छठी से आठवीं कक्षा के करीब 75 हजार छात्रों को राहत मिलेगी।
शीर्ष अदालत ने भी सरकार के इस निर्णय को अच्छा समाधान बताया है। अगर परीक्षा न हो तो क्या परेशानी हो सकती है। जो जर्मन भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं वे इसे जारी रख सकते हैं।
अदालत ने कहा कि इस सत्र में संस्कृत की परीक्षा नहीं होने पर छात्रों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। हालांकि सरकार अब भी केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत को तीसरी भाषा बनाने के निर्णय पर प्रतिबद्ध है।