सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने बुधवार को दावा किया कि निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शिकायत में गवाह नहीं थे बल्कि वह तथ्यों को जोड़तोड़ कर पेश करने वाले हैं।
एसआईटी के वकील आरएस जमुआर ने कहा कि संजीव भट्ट कभी भी मुख्यमंत्री मोदी की किसी भी बैठक में शामिल नहीं थे बल्कि वह सब कुछ अपने मन से गढ़ रहे हैं। वह तथ्यों को गलत ढंग से पेश कर रहे हैं।
उन्होंने न सिर्फ एमिकस क्यूरे (जाकिया जाफरी की याचिका में) राजू रामचंद्रन को बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी प्रभावित करने के लिए दबाव बनाने की खातिर मीडिया का कार्ड खेला। जमुआर मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट वीजे गणत्र के सामने दलील पेश कर रहे थे।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एसआईटी द्वारा मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ जाकिया की चुनौती याचिका की सुनवाई कर रहे हैं। दलील के छठे दिन जमुआर ने एसआईटी द्वारा पेश किए गए दावे के पक्ष में साक्ष्य पेश किए।
इसमें कहा गया है कि भट्ट विश्वसनीय गवाह नहीं हैं। निलंबित आईपीएस अधिकारी की कड़ी आलोचना करते हुए जमुआर ने राज्य सरकार द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक शिकायत की जांच के दौरान जुटाए गए कुछ ई-मेल की सामग्री का हवाला दिया।
इसमें भट्ट द्वारा कथित तौर पर नासिर चिप्पा, पत्रकार शुभ्रांशु, सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और तत्कालीन गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता शक्ति सिंह गोहिल और आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा (जिन्होंने 2002 के दंगों के दौरान किए गए फोन कॉल का विवरण जुटाया था) को भेजे गए ई-मेल शामिल हैं।