हिंदू दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था ने महाराष्ट्र में अंधविश्वास के विरुद्घ सक्रिय नरेंद्र दाभोलकर की हत्या से जुड़े मामले से खुद को अलग कर लिया है। संगठन ने उनकी मौत से कोई भी संबंध होने से इनकार किया है।
सनातन के प्रवक्ता अभय वर्तक ने बुधवार को कहा, "हम दभोलकर की हत्या से हैरान हैं, हमारा उनकी हत्या से कोई लेना-देना नहीं है।"
दाभोलकर के काम की तारीफ करते हुए वर्तक ने कहा कि उन्होंने सराहनीय कार्य किए हैं। संगठन के दाभोलकर से केवल वैचारिक मतभेद थे, व्यक्तिगत तौर पर कोई दुश्मनी नहीं थी। दाभोलकर भगवान के सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान होने के संगठन के विचारों से सहमत नहीं थे।
दाभोलकर को मिली थी गांधी की तरह मारने की धमकी
मीडिया में चल रही खबरों पर वर्तक ने बचाव करते हुए कहा कि संगठन ने एक और गांधी (गांधी की तरह मारने की धमकी) की बात कभी नहीं की। उन्हें बली का बकरा बनाया जा रहा है।
इसी दौरान एक सनातन पदाधिकारी ने दाभोलकर अंध्रश्रद्घा निर्मूलन समिति को विदेश से चंदा मिलने का आरोप लगाया।
तांत्रिकों और बाबाओं के निशाने पर
पुणे में नरेंद्र दाभोलकर की मंगलवार को दो अनजान हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह उस समय सुबह सैर पर निकले थे।
अंधविश्वास का विरोध किया तो सिर में मारी गोली
दाभोलकर पिछले 40 साल से अंधश्रद्घा के विरुद्घ आंदोलन चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे थे। उनकी अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति पिछले 14 बरस से अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून बनवाने के लिए अभियान चला रही है।
दाभोलकर को अपने आंदोलन के खिलाफ कई बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी थी।
पिछले दो दशकों में उन्होंने लोगों को श्रद्घा के नाम पर बरगलाने और लूटने वाले कई तांत्रिकों, बाबाओं और गुरुओं को निशाना बनाया। अंधविश्वास के खिलाफ बिल आने पर इन्हें ही सबसे अधिक नुकसान होने वाला था।
दिग्विजय ने याद दिलाया पुणे ब्लास्ट
नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की निंदा करते हुए बुधवार को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने हत्या के पीछे छिपे लोगों को पहचानने की बात कही।
साथ ही दिग्विजय ने ध्यान दिलाया कि यह घटना उसी जगह हुई है जहां बम विस्फोट हुआ था। साल 2010 में पुणे में हुए बम विस्फोट में कुछ दक्षिणपंथी अतिवादी संगठनों का नाम सामने आया था।
दिग्विजय से पूछे जाने पर कि क्या वे इस हत्या में किसी दक्षिणपंथी संगठन के शामिल होने की बात बात कह रहे हैं, उन्होंने इस प्रश्न को टाल दिया। दाभोलकर की हत्या के विरोध में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने आज पुणे में बंद का आह्वान किया है।