खाद्य सुरक्षा बिल पर एक बार फिर सपा के खाने और दिखाने के अलग-अलग दांत दिख गए हैं।
पार्टी ने इस बिल की राह रोकने का बढ़ चढ़कर दावा किया था, लेकिन लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी सपा इस बिल के ज्यादा विरोध के मूड में नहीं है।
खाद्य सुरक्षा बिल से पहले राष्ट्रपति चुनाव, लोकपाल, खुदरा एफडीआई और अन्य कई मुद्दों पर संसद में आए काम रोको प्रस्ताव पर भी सपा ने कभी सदन में रहकर तो कभी वाकआउट कर यूपीए सरकार की नैया पार लगाई है।
पहले बसपा सरकार का साथ देती थी तो सपा को भी कांग्रेस का साथ देना पड़ता था। अब जदयू भी परोक्ष रूप से सरकार के साथ है। ऐसे में सरकार को मदद देने की प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
लोकसभा में पारित होने के बाद अब खाद्य सुरक्षा बिल को बृहस्पतिवार या सोमवार को राज्यसभा में पेश करने की बात है। राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। ऐसे में उसे सपा और बसपा की मदद की सख्त जरूरत है।
बसपा पहले से ही बिल के समर्थन में है, लेकिन सपा किसानों के हित का नारा देकर इसका विरोध कर रही है। सोमवार को लोकसभा में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बिल में शामिल कई बातों का विरोध किया था, लेकिन अब सपा के तेवर ढीले हो गए हैं।
पार्टी संशोधनों को रखने की बात तो कर रही है, लेकिन इस पर वह कितना जोर देगी इस बात को लेकर संशय है।
राज्यसभा में सपा सांसद नरेश अग्रवाल का कहना है कि उनकी पार्टी बिल के खिलाफ नहीं है। सपा कुछ संशोधन चाहती है। सरकार को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।
अपने संशोधन पर सदन में वोटिंग की मांग करने के सवाल पर अग्रवाल हामी भरते हैं, लेकिन पार्टी के तेवर पस्त लग रहे हैं।
सपा पर विपक्षी दल आरोप लगाते रहे हैं कि वह मुश्किल की घड़ी में सरकार के साथ सौदेबाजी करने का कोई मौका हाथ से जाने देना नहीं चाहती।
खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मामले में सपा वामदलों के साथ सड़कों पर उतरी, लेकिन मगर सदन में इस मुद्दे पर वोटिंग के समय वाकआउट कर पार्टी ने सरकार को राहत दे दी।
राष्ट्रपति चुनाव के समय मुलायम सिंह ने ममता बनर्जी से हाथ मिलाया था, लेकिन बाद में कांग्रेस के साथ हो गए। उपराष्ट्रपति चुनाव में भी ऐसा ही हुआ।
लोकपाल बिल को जन विरोधी बताने के बाद भी लोकसभा में सपा ने सरकार का साथ दिया था। महंगाई समेत तमाम मुद्दों पर लोकसभा में आए काम रोको प्रस्ताव के वक्त भी मुलायम सिंह ने सरकार का साथ दिया है।