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पत्रकार बनकर गई थी सचिन के घर: अंजलि

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सचिन तेंदुलकर की आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' का बुधवार को मुंबई में विमोचन हुआ। सचिन ने आत्मकथा की सबसे पहली प्रति अपनी मां रजनी को दी। सचिन ने ट्वीट किया, "अपनी क़िताब की पहली प्रति अपनी मां को दी। उनके चेहरे पर गौरव देखना बेशकीमती लम्हा था!"
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सचिन ने किताब की एक प्रति अपने गुरु रमाकांच आचरेकर को भी भेंट की। इस मौके पर मुंबई पर आयोजित एक कार्यक्रम में सचिन की पत्नी अंजलि ने बताया कि वह पहली बार सचिन के घर पत्रकार बनकर गई थी।

नारंगी टी शर्ट
अंजलि ने बताया, "सचिन ने कहा कि लड़की के लिए मेरे घर आना मुश्किल होगा। तुम पत्रकार बनकर आ सकती हो। इसलिए मैं पत्रकार बनकर पहली बार सचिन के घर गई।"

अंजलि ने यह भी बताया कि सचिन से पहली मुलाक़ात के दौरान उन्होंने नारंगी रंग की जो टी-शर्ट पहनी थी, उसे आज भी उन्होंने अपने पास सुरक्षित रखा है। इस मौकै पर सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, रवि शास्त्री, सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण समेत कई दिग्गज हस्तियां भी मौजूद थीं।
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सचिन से प्रभावित

इन खिलाड़ियों ने सचिन से जुड़े कई सुनहरे पलों का याद किया। गावस्कर ने कहा, "मैंने सचिन को पहली बार वानखेड़े के मैदान में खेलते हुए देखा था। तेज़ गेंदबाज़ राजू कुलकर्णी के ख़िलाफ़ जिस तरह से वो बैकफ़ुट पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे, उससे मैं बहुत प्रभावित था।"

सचिन ने अपनी आत्मकथा में 32वें पन्ने पर पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर का जिक्र किया है। वेंगसरकर ने कहा, "मैं तब भारतीय टीम का कप्तान था। वासु परांजपे ने मुझे सचिन का खेल देखने को कहा। तब वह 15 साल के थे। मैंने कपिल देव और अरशद अयूब जैसे गेंदबाज़ों से सचिन को गेंदबाज़ी कराई। मैं बहुत प्रभावित था। फिर मैंने चयनकर्ताओं से बात की और कहा कि सचिन को कम से कम 15 खिलाड़ियों में चुन लिया जाना चाहिए।"

सिडनी का पराक्रम
कई साल तक सचिन के साथ खेले रवि शास्त्री ने बताया कि किस तरह पाकिस्तान के पहले दौरे में सचिन में घबराए हुए थे। सिडनी टेस्ट में सचिन के शतक को याद करते हुए शास्त्री ने कहा, "18 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन आक्रमण के सामने शतक लगाते हुए देखा।

ऑस्ट्रेलिया के वॉ बंधुओं समेत कई खिलाड़ी उनके ख़िलाफ़ छींटाकशी कर रहे थे। सचिन गुस्से में थे, लेकिन मैंने उनसे कहा कि तुम्हें मुंह से कुछ नहीं कहना है, बैट से जवाब देना है। और फिर उन्होंने 148 रन बनाए।"
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मराठी में बातें

राहुल द्रविड़ ने मुल्तान टेस्ट विवाद पर कहा, "मैदान और मैदान के बाहर विवाद होते रहते हैं, लेकिन हमने मुल्तान विवाद को तुरंत सुलझा दिया था। पारी घोषित करने के बाद मैंने दिन का आख़िरी ओवर सचिन से ही कराया था और उन्होंने मोईन ख़ान का विकेट लिया।"

राहुल द्रविड़ ने यह भी बताया कि जब वह और सचिन दोनों साथ बल्लेबाज़ी कर रहे होते थे तो मराठी में काफी बातें किया करते थे।

'सचिन को पसंद थी ओपनिंग'
सौरभ गांगुली ने कहा, "सचिन से पहली बार इंदौर में अंडर-19 शिविर के दौरान मिला था और तब भी वो बहुत भारी बल्ले से बल्लेबाज़ी किया करते थे।"

बल्लेबाज़ी क्रम के बारे में विवाद पर गांगुली ने हंसते हुए कहा, "सचिन से पूछा गया था कि चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करोगे, सचिन का जवाब था- मुझे जिस क्रम पर बल्लेबाज़ी करने को कहोगे, करूंगा- लेकिन मेरी पसंद पूछोगे, तो वो ओपनिंग ही है।"
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