महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के बीच सत्ता समीकरण को लेकर अविश्वास बढ़ता जा रहा है। बुधवार को भाजपा ने शिवसेना के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने साफ कहा कि सदन में बहुमत सिद्ध होने के बाद ही राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। इससे शिवसेना को एक बार फिर झटका लगा है। इसको देखते हुए शिवसेना ने नौ नवंबर को विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसमें भाजपा सरकार को समर्थन देने के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
शिवसेना ने भाजपा को चार दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि वह आठ नवंबर तक मंत्रिमंडल विस्तार पर अपना रुख साफ करे। शिवसेना का कहना है कि यदि भाजपा कोई फैसला नहीं लेती है तो हम भाजपा सरकार को समर्थन देने के बजाय विपक्ष में बैठेंगे और सदन में अपने दल के नेता की घोषणा कर देंगे।
ऐसे में भाजपा के बाद दूसरी नंबर की पार्टी शिवसेना को विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद हासिल हो जाएगा। इसे शिवसेना का प्लान बी माना जा रहा है। दरअसल, शिवसेना चाहती है कि सदन में बहुमत साबित करने से पहले कम से कम दो कैबिनेट मंत्री को शपथ दिलाई जाए और बहुमत सिद्ध होने के बाद शिवसेना के मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जाए।