कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 56 दिनों की छुट्टियां बिताकर आज दिल्ली वापस लौट आए।
राहुल गांधी के स्वागत के लिए उनकी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी 12 तुगलक रोड स्थित उनके आवास पर मौजूद रहीं। 23 फरवरी को राहुल गांधी के छुट्टी पर जाने की खबर आई थी। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि राहुल राजनीतिक हालात पर चिंतन के लिए छुट्टी ली है।
ऐसी चर्चा भी हुई कि राहुल कांग्रेस के भीतर अपने फैसलों पर अमल नहीं करा पा रहे हैं, इसलिए नाराज होकर वह छुट्टी पर चले गए। दिल्ली विधानसभा चुनावों एक भी सीट न जीत पाने के कारण पार्टी के भीतर के राहुल का विरोध लगातार बढ़ रहा था।
कांग्रेस में बुजुर्ग नेताओं का समूह राहुल की कामकाज की शैली से नाखुश बताया गया। माना गया है कि राहुल की छुट्टी दरअसल कांग्रेस के भीतर 'ओल्ड गार्ड' और 'न्यू गार्ड' के टकराव का नमूना भर है।
राहुल की छुट्टियों पर उठते रहे सवाल
माना जा रहा है कि राहुल 19 अप्रैल को दिल्ली में किसानों की रैली को संबोधित कर सकते हैं। इससे पहले खबर आई थी कि राहुल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन पर वापस आएंगे। हालांकि उस दिन वह नहीं आए।
छुट्टियों के दौरान राहुल कहां रहे, इसे लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे। दावा किया गया कि राहुल म्यांमार मे विपश्यना कर रहे हैं। कांग्रेस के ही एक नेता जगदीश शर्मा ने दावा कि राहुल उत्तराखंड में कैंपिंग कर रहे हैं। उन्होंने सबूत में तस्वीरें भी पेश की, हालांकि कांग्रेस ने उन तस्वीरों का पुरानी बताया और उनके दावे का खंडन किया।
राहुल की छुट्टी पर विपक्ष समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी सवाल उठाया। कांग्रेस के भीतर भी ऐसी सुगबुगाहट हुई कि राहुल ऐसे समय छुट्टी पर गए, जब संसद में बजट सत्र चल रहा था और भूमि अधिग्रहण पर केंद्र सरकार घिरी हुई थी।
राहुल ने अमेठी का दौरा भी नहीं किया
पिछले दो महीने में मौसम की मार के कारण किसानों की भारी नुकसान उठाना पड़ा। राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में भी किसानों को भारी नुकसान हुआ। हालांकि उस समय राहुल के बजाय सोनिया गांधी ने अमेठी का दौरा किया।
ऐसी खबरें भी आईं कि छुट्टियों से लौटने के बाद राहुल को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। देखना यह है कि लौटने के बाद राहुल को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाता है या नहीं?
राहुल को कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग काफी समय से उठ रही है। हालांकि लोकसभा चुनाव समेत कई विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के कारण राहुल का नेतृत्व संदेह के घेरे में भी रहा है।