भाजपा के खिलाफ बिहार में बने महागठबंधन में नेतृत्व के सवाल पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार को महागठबंधन में मुख्यमंत्री का दावेदार बताकर महागठबंधन की नैया को नेतृत्व के मझधार में पहुंचा दिया है।
मांझी के बयान के बाद गठबंधन के अंदर नेतृत्व को लेकर चला आ रहा मतभेद सतह पर आ गया है। राजद और कांग्रेस ने मांझी के इस बयान को गैरजरूरी और गठबंधन को कमजोर करने वाला बताया है, तो भाजपा ने इसे बनने से पहले ही टूटने का संकेत कहा है।
दो दिन पूर्व ही राजद सांसद पप्पू यादव ने बयान देकर इस बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने माना कि विकास के मसले पर नीतीश का कोई मुकाबला नहीं है। अपने ही सांसद पप्पू के इस बयान के बाद लालू सख्त हुए। उन्होंने तत्काल प्रवक्ता के माध्यम से कार्रवाई की बात कह दी।
नीतीश को विकास का काम करने की सलाह
इसके बाद पप्पू ने बयान में थोड़ा संशोधन कर लालू के नेतृत्व में नीतीश को विकास का काम करने की सलाह दे दी। मगर मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इस बहस को यह कहकर आगे बढ़ा दिया कि अगले चुनाव में बहुमत मिलने पर नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे।
राजद ने मांझी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे गठबंधन के लिए अहितकारी बताया है। राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि दोनों दलों के नेताओं को अभी इस मसले पर बयान देने से बचना चाहिए, जब नेतृत्व के फैसले पर कोई विचार नहीं हुआ है तो ऐसे बयान का अभी कोई औचित्य नहीं है।
राजद विधायक दल के नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी ने भी मांझी के बयान को गैरजरूरी और गठबंधन को कमजोर करने वाला बताया। कांग्रेस के प्रवक्ता प्रेमचंद्र्र मिश्रा ने भी माना कि अभी नेतृत्व या सीएम पद के उम्मीदवार पर बोलना जल्दबाजी है, पार्टी ने अभी इस पर कोई विचार नहीं किया है।
नीरज कुमार ने खुलकर मोर्चा संभाला
दूसरी ओर, मांझी के बयान के समर्थन में जदयू के संजय सिंह, लेसी सिंह और नीरज कुमार ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है।
वैसे मामले को गंभीर होता देख जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि नीतीश कुमार जदयू के नेता हैं, लेकिन गठबंधन के अंदर अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।
नेतृत्व के सवाल पर नेताओं की इस बयानबाजी पर भाजपा ने भी चुटकी ली है। भाजपा के रामनरेश चौरसिया ने कहा कि यह गठबंधन बनने से पहले ही टूट जाएगा।
जिस गठबंधन को जीत की कोई उम्मीद नहीं है वहां नेतृत्व को लेकर बयानबाजी दिखा रही है कि यह मिलन समारोह केवल सत्ता के लिए हुआ है।