भाजपा का नया चेहरा बनाए गए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी तरह का कोई समझौता नहीं करेगा।
बृहस्पतिवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की सवा घंटे की मुलाकात के दौरान पार्टी के कामकाज के तरीके पर गंभीर चर्चा हुई।
इस दौरान भाजपा में संघ के प्रतिनिधियों की मनमानी पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में आडवाणी ने पार्टी में सामूहिक नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया।
राजधानी के झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय केशवकुंज में हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच वर्तमान राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ मोदी का कद बढ़ाए जाने के बाद राजग में हुई टूट पर भी बातचीत हुई।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक मुलाकात के दौरान आडवाणी ने भविष्य में अन्य दलों के सहयोग की जरूरत के मद्देनजर पार्टी में सामूहिक नेतृत्व पर बल दिया।
उनका कहना था कि व्यक्ति विशेष को आगे करने से चुनाव से पहले और बाद में सरकार बनाने के लिए अन्य दलों से सहयोग मिलने में परेशानी हो सकती है।
बताते हैं कि आडवाणी ने पार्टी के हाल के कुछ फैसलों की चर्चा करते हुए वरिष्ठ नेताओं द्वारा अपना एजेंडा चलाने और इसमें पार्टी में संघ का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों के मनमानी की भी शिकायत की।
उनके निशाने पर खासतौर से संघ के संयुक्त महासचिव सुरेश सोनी और संगठन महासचिव रामलाल थे। आडवाणी से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने भी भागवत से आधे घंटे बातचीत की थी।
संघ सूत्रों के मुताबिक भागवत ने मोदी के मामले में कदम पीछे न खींचने का साफ संकेत दे दिया, लेकिन उन्होंने पार्टी और संघ के प्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली के संबंध में शिकायतें दूर करने का ठोस आश्वासन दिया है।
इस दौरान भागवत ने रणनीति तय करने और फैसला करने के मामले में सामूहिक निर्णय की व्यवस्था का भी ठोस आश्वासन दिया। उन्होंने आडवाणी को आश्वस्त किया कि पार्टी नेतृत्व कोई भी फैसला उनसे विचार-विमर्श के बाद ही करेगा।
आडवाणी का मानना था कि देश में फिलहाल गठबंधन का दौर खत्म होने की संभावना नहीं है। इसलिए राजग का कुनबा बढ़ाने के लिए पार्टी में सामूहिक नेतृत्व विकसित किया जाना चाहिए।