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5,000 परिवारों का धर्म परिवर्तन करवाएगा RSS

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिन और क्रिसमस के मौके पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने 5000 अल्पसंख्यक परिवारों को धर्मांतरण करके हिंदू धर्म में शामिल करने की योजना बनाई है। आरएसएस का दावा है कि ये परिवार पहले हिंदू ही थे, लेकिन बाद में अन्य धर्मों को स्वीकार कर लिया।
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आरएसएस की योजना के मुताबिक 4000 क्रिश्चियन और 1,000 मुस्लिम परिवारों का धर्मांतरण करवाया जाएगा। इस योजना को आरआरएस ने घर वापसी का नाम दिया है। आरएसएस इस कार्यक्रम का आयोजन अलीगढ़ में करने जा रहा है। इस मौके पर भाजपा के फायरब्रांड सांसद आदित्य योगीनाथ के भी मौजूद रहने की संभावना है।

इकॉनामिक टाइम्स की खबर के मुताबिक आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक राजेश्वर सिंह ने बताया कि अलीगढ़ शहर को चुनने की प्रमुख वजह है कि समय आ गया है जब मुस्लिमों से अपने शहर को वापस लें। यह शहर बहादुर राजपूतों का शहर है। इस शहर में हिंदुओं के मंदिरों पर मुस्लिम संस्थाओं को बनाया गया है।
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क्रिसमस के दिन का चुनाव करने पर राजेश्वर सिंह ने कहा कि इस आयोजन को हम शक्ति प्रतिष्ठा से जोड़ कर देख रहे हैं। सिंह ने कहा कि अगर उनका धर्म अच्छा है तो वो उन लोगों को रोक कर दिखाएं। यह उनके और हमारे दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। अगर उस समाज के लोग क्रिसमस के दिन हमारे पास आते हैं तो यह बहुत बड़ी बात होगी।
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'आरएसएस को दोहरा चरित्र'

अलीगढ़, हाथरस, बुलंदशहर के 40 स्लम एरिया का चुनाव किया गया है। 4000 ईसाई परिवार जो वाल्मीकि समाज से जुड़े हुए हैं।

1000 ऐसे मुस्लिम परिवारों का चुनाव किया गया है जो कभी ठाकुर और ब्राह्मण थे। अब इस कार्यक्रम के वह अपने खोए हुए सम्मान को पा सकेंगे। आरआरएस कार्यकताओं ने कहा कि धर्मांतरण के सालाना कार्यक्रम है।

आरआरएस कार्यकर्ता पंकज सिंह ने बताया कि पिछले कुछ सालों में यह आयोजन हाशिए पर चला गया था। लोग कई सालों से हिंदू धर्म में वापस आना चाहते हैं। इस बार हम कोई मौका नहीं जाने देंगे। अभी हम लोगों को इस बाबत समझा रहे हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति और सांझी दुनिया की संस्‍थापक रूपरेखा वर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन उनके दोहरे चरित्र को दिखाते हैं। यह दिखाता है कि आरएसएस का अल्पसंख्यकों के प्रति रवैया कैसा है? वह अल्पसंख्यकों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। एक तरफ वो कहते हैं कि धर्मांतरण करके वापस आए लोगों को एक सा देखा जाएगा। वहीं दूसरी तरफ सनातन धर्म की बात करते हैं  जिसके तहत ऐसे लोगों को दूसरी जातियों का माना जाएगा।
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