भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी भले ही लोकसभा की सियासी जंग में विकास, सुशासन के मुद्दे पर चुनाव मैदान में हों, लेकिन धर्मनगरी वाराणसी से उन्हें प्रत्याशी बनाकर संघ परिवार ने वास्तव में नरम हिंदुत्व की लाइन पकड़ी है। इस फैसले से भाजपा के एक तीर से कई निशाने भी साधे हैं।
मोदी की लहर के चलते भाजपा अब उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार में भी ज्यादा राजनीतिक लाभ देखने लगी है। जबकि लंबे समय से अयोध्या के राममंदिर को लेकर खामोश हो चुकी भाजपा ने इस फैसले से कट्टर हिंदूवादियों को संदेश देने की कोशिश की है कि धर्मनगरी काशी का पार्टी के लिए अयोध्या जैसा ही महत्व है।
इसे भाजपा की नरम हिंदुत्व की लाइन पर चलने रहने का संकेत भी माना जा रहा है। भगवान शिव को लेकर ‘हर-हर महादेव’ के नारे तो सदियों से सुने जाते रहे हैं, लेकिन भाजपा की ओर से ‘हर-हर मोदी, घर घर मोदी’ का नारा भी इसी उद्देश्य से दिया गया है।
मोदी के बहाने हिंदुत्व की चाल
वैसे भी अयोध्या, काशी और मथुरा शुरू से ही संघ परिवार के ऐजेंडा में रहे हैं। खासतौर पर विश्व हिंदू परिषद अध्योध्या के साथ काशी व मथुरा के मंदिरों को भी ‘मुक्त’ कराने की मांग करती रही है।
गुजरात विधानसभा चुनाव में हैट्रिक बना चुके मोदी भले ही अब विकास, सुशासन व सख्त प्रशासक के तौर पर अपनी नई छवि गढ़ चुके हों, लेकिन संघ परिवार के कट्टरवादी नेताओं से लेकर देशभर में उनकी छवि हिंदूवादी नेता की भी है।
2002 के गुजरात दंगों को लेकर उनके विरोधी उन्हें अब भी उसी छवि में कैद रखने की कोशिश करते रहे है। संघ परिवार भी यह बात जानता है। इसी लिए उन्होंने मोदी के लिए काशी को चुना।
विकास पुरुष और सख्त प्रशासक
इसके अलावा गुजरात के विकास कार्यों के चलते अपनी छवि विकास पुरुष व सख्त प्रशासक की छवि बनाने में कामयाब रहे मोदी के काशी में आने से अब भाजपा विकास के मामले में पिछड़ चुके उत्तर प्रदेश व बिहार में भी विकास पर भी चर्चा शुरू करने की कोशिश करेगी।
यदि विरोधियों के चलते चर्चा सांप्रदायिकता पर भी केंद्रित हो गई तो भी भाजपा इसे अपने हित में मान रही है। इससे हिंदू वोट उसके साथ लामबंद होंगे। काशी सिर्फ धर्म नगरी ही नहीं है, यह पूर्वांचल की राजनीतिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है।
वाराणसी में लगभग 25 फीसदी आबादी बिहार के लोगों की है। काशी विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश के साथ बिहार से भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी काशी के छात्र-छात्राएं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बिहार पर भी निशाना
भाजपा को उम्मीद है कि छात्र-छात्राओं के जरिये अब बिहार तक अब मोदी की मौजदूगी महसूस होगी। इसके अलावा मोदी की पिछड़ी जाति को भुनाने का भी भाजपा को मौका मिलेगा।
देश में ओबीसी जातियों का सबसे ज्यादा मौजूदगी उत्तर प्रदेश व बिहार के इन्हीं क्षेत्रों में हैं। अब ये जातियों भी मोदी के पीछे लामबंद होंगी।इसलिए भाजपा अपना फायदा ही फायदा देख रही है।