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सरकार-विपक्ष के बीच अब होगा असली मुकाबला

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नरेंद्र मोदी सरकार और विपक्षी पार्टियों के बीच संसद में इस हफ्ते असली मुकाबला छिड़ने के हालात बन गए हैं। सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी के बाद मंगलवार से शुरू होने वाली कार्यवाही के दौरान सरकार के सामने पांच अहम बिलों को संसद से पास कराने की बड़ी चुनौती है। लोकसभा में कामकाज के तीन दिन ही बचे हैं।
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बावजूद इसके जीएसटी, रीयल एस्टेट और भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सरकार को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इन तीनों बिलों के खिलाफ समूचा विपक्ष एकजुट हो गया है। कांग्रेस, माकपा, तृणमूल कांग्रेस और जनता परिवार इन तीनों बिलों के विरोध में हैं। बांग्लादेश के साथ भूमि अदला बदली कानून और किशोर न्याय विधेयक को भी इसी हफ्ते पेश होने की बात है।

वस्तु एवं सेवा कर विधेयक को लेकर कांग्रेस ने तर्क दिया है कि वह विधेयक का समर्थन करती है। मगर जिस तरह से सरकार विधेयक को जल्दबाजी में पेश करवाना चाहती है। उसे लेकर पार्टी का विरोध है।
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दो-दो हाथ करने के मूड में

कांग्रेस का कहना है कि बिल पर अभी और बात करने की जरूरत है। दूसरे विपक्षी दल भी यही वजह बताकर इसका विरोध कर रहे हैं। अपने सहयोगी दलों के अलावा सरकार को अपने साथी के तौर पर फिलहाल कोई नहीं दिख रहा है।

रियल एस्टेट कारोबार को सरकारी नियम कानून के दायरे में लाने के विधेयक को लेकर कांग्रेस और विपक्ष ने विरोध कर दिया है। राहुल के हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस ने भूमि बिल की तर्ज पर इसका विरोध करना शुरू कर दिया हे। पार्टी का कहना है कि यूपीए सरकार के विधेयक में बदलाव कर मोदी सरकार ने इसे बिल्डरों के फायदे तो ग्राहकों के नुकसान का पुलिंदा बना दिया है।
 
भूमि अधिग्रहण विधेयक पर तो कांग्रेस और विपक्ष पहले ही दो-दो हाथ करने के मूड में है। भारत-बांग्लादेश के बीच भूमि अदला बदली कानून को लेकर असम की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर कांग्रेस यहां भी पेंच फंसा सकती है। हालांकि कैबिनेट से पास प्रारूप में असम का बाहर रखा गया है।
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