दंगा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर गए उत्तर प्रदेश के लोकनिर्माण विभाग के मंत्री शिवपाल यादव को कांधला शरणार्थी शिविर में पहुंचते ही पीड़ितों की नाराजगी का सामना करना पड़ा।
पीड़ितों ने कहा कि मंत्री जी हम पर बहुत जुल्म हुआ। हमारे घर जला दिए गए, खूब कत्लेआम मचा। बच्चों को लेकर खेतों में छिपते फिरे, कई लोग गायब हैं। पुलिस भी खड़ी होकर तमाशा देखती रही।
पीड़ितों ने कहा कि असलियत जाननी है, तो मंत्री जी हमारे गांव में जाकर देखो हमारी तबाही का हाल।
सोमवार की सुबह करीब 10:45 बजे राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप, शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, वसीम राणा, रामसकल गूर्जर, साहब सिंह वर्मा के साथ शिवपाल यादव कांधला इंटर कॉलेज के मैदान में हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद सीधे शरणार्थी शिविर पहुंचे।
हिंसा के बाद दंगा पीड़ित गांवों से पलायन कर कांधला के ईदगाह मैदान स्थित मदरसे में ठहरे शरणार्थी शिवपाल यादव के पहुंचते ही बिफर पड़े। पीड़ितों ने मंत्री को अपने मन की पीड़ा सुनाई।
लिसाढ़ के हाकम ने बताया कि उनके घरों में आग लगा दी गई। कत्लेआम होता रहा। लोग छोटे-छोटे बच्चों को लेकर रातभर भूखे-प्यासे डर के मारे खेतों में पड़े रहे। 14 लोग गायब हैं, जिनका अभी तक कोई पता नहीं।
न्याय का दिया भरोसा
मंत्री ने उनसे लिखित में देने को कहा। शब्बीर अहमद ने तत्कालीन एसओ फुगाना पर आरोप लगाया कि लोग चिल्लाते रहे, लेकिन एसओ ने एक नहीं सुनी, उसने भी दूसरों की मदद की। जाहिद खान और लिसाढ़ से आए कई लोगों ने मंत्री से कहा कि यहां आने से कोई फायदा नहीं। मंत्री जी तबाही का मंजर देखना है तो लिसाढ़ में जाकर देखिये।
सिमालखा, बहावड़ी, लांक आदि स्थानों से पीड़ितों ने भी अपनी पीड़ा सुनाई। मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि वह अपनी रिपोर्ट दर्ज कराएं। सरकार उन्हें न्याय देगी, उनके नुकसान की भरपाई करेगी और दोषियों को हर हाल में किए की सजा मिलेगी।
इससे पूर्व, मंत्री ने कैंप में लगे स्वास्थ्य विभाग शिविर में इलाज करा रहे शरणार्थियों से दवाओं और इलाज के बारे में पूछताछ की। इसके बाद में उन्होंने मदरसे में हजरत जी इफ्तखार-उल-हसन और अन्य उलेमा से बंद कमरे में 15 मिनट गुफ्तगू की।
मंत्री ने समाज की एक कमेटी बनाकर लखनऊ में इस संबंध में वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। यहां के बाद वह सीधे मुजफ्फरनगर के जोगिया खेड़ा के लिए निकल गए।
डीजीपी ने लिसाढ़ की हकीकत जानी
पुलिस महानिदेशक देवराज नागर ने लिसाढ़ गांव का दौरा किया और वहां हुई हिंसा और जले हुए मकानों को देखा। यहां प्रधान संगठन ने उन्हें ज्ञापन देकर हिंसा के मुकदमे में निर्दोष लोगों को नहीं फंसाने की मांग की। उनके साथ मुजफ्फरनगर जिले के पुलिस अधिकारी मौजूद थे।