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रेड लाइट एरिया से छुड़ाई गईं 13 लड़कियां फरार

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प्रतापगढ़ शहर के अजीत नगर स्थित बाल गृह बालिका से बुधवार की भोर में गेट तोड़कर 13 लड़कियां भाग निकलीं। महिला होमगार्ड ने विरोध किया तो उस पर हमला भी बोला। मामले की जानकारी मिलते ही आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुलिस को भागी लड़कियों की तलाश करने का आदेश दिया। इससे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा रहा।
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राजकीय संरक्षण गृह आगरा से 20 दिसंबर को 14 लड़कियां बाल गृह अजीत नगर लाई गईं। दो दिन बाद ही लड़कियों ने बाल गृह बालिका में जमकर हंगामा किया। इसके चलते दिन रात उनकी सुरक्षा में महिला होमगार्ड तैनात कर दी गईं। मंगलवार की रात किशोरियों की सुरक्षा के लिए महिला होमगार्ड आशा पांडेय ड्यूटी पर भेजी गईं थीं।

होमगार्ड आशा की मानें तो बुधवार की भोर कमरे में बंद एक किशोरी ने शौचालय जाने की बात कहते हुए दरवाजा खुलवाया। महिला होमगार्ड उसे लेकर शौचालय की ओर जाने लगी तभी पीछे से उसके ऊपर कई किशोरियों ने हमला बोल दिया। लड़कियों ने उसका मुंह बंद करने के बाद उसे मारापीटा भी।
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अचानक हुए हमले के चलते वह बेहोश होकर गिर पड़ी। मौका देख लड़कियों ने मुख्य गेट की सरिया तोड़ डालीं। इसके बाद वहां से 13 लड़कियां फरार हो गईं। जबकि उनके साथ भेजी गई एक लड़की सोती ही रह गई। इस दौरान होश में आने पर महिला होमगार्ड ने शोर शराबा मचाया तो सभी को मामले की जानकारी हो सकी।

पुलिस महकमे में मच गया हड़कंप

घटना की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। शहर कोतवाल बलिराम मिश्र, सीओ सिटी एमपी सलोनिया मौके पर पहुंचे और जानकारी के बाद भागी लड़कियों की तलाश करने के लिए टीमें स्टेशन और रोडवेज स्टेशन के साथ ही वाहन अड्डों की ओर भेजी।

किशोरियों के भागने की खबर पर एडीएम पुनीत शुक्ला और एसडीएम जेपी मिश्रा भी मौके पर पहुंचे और बाल गृह बालिका के अधीक्षक से मामले की जानकारी ली। इस मामले में अधीक्षक वंदना ने जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्रा को घटना की बाबत पत्र भेजा।

उनके पत्र को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रोबेशन अधिकारी ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। एएसपी पूर्वी बृजेश मिश्रा ने बताया कि बाल गृह बालिका में 14 लड़कियां 20 दिसंबर को राजकीय संरक्षण गृह महिला आगरा से भेजी गईं थीं। जो मौका देख फरार हो गईं। फरार होने वाली लड़कियां नेपाल, असम, कलकत्ता की बताई जा रहीं हैं। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। उनकी तलाश में पुलिस टीमें लगाई गई हैं।

लड़कियों ने पहले किया था बवाल

बाल गृह बालिका अजीत नगर में 20 दिसंबर को लाई गई 14 लड़कियों ने 22 दिसंबर को जमकर हंगामा किया था। बवाल की खबर पर शहर कोतवाल बलिराम मिश्र और महिला एसओ दुर्गावती भी मौके पर पहुंचीं और उनके हंगामे को देखते हुए महिला गार्डो को दिन रात सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया गया।

पुलिस को ऐसे हुआ भरोसा
बाल गृह बालिका से फरार लड़कियों की खबर मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंचीं। इस बीच शहर कोतवाल और सीओ सिटी भी वहां पहुंचे। जिस गेट से किशोरियों के भागने की जानकारी दी जा रही थी। उसे देखने के बाद सीओ सिटी को आशंका हुई। उन्होंने संदेह जताया तो अधीक्षक ने उस गेट से अपने ही कर्मचारी को बाहर निकलवाया। तब जाकर पुलिस को भरोसा हुआ।

पत्र लिखा नहीं मिली मदद
बाल गृह बालिका की अधीक्षक वंदना की मानें तो उन्होंने आगरा से लाई गईं लड़कियों की बाबत अफसरों को पत्र पर पत्र लिखा लेकिन कोई मदद नही मिली। उनके मुताबिक आगरा से भेजी गईं लड़कियां पूरी तरह से बालिग थीं।

उनका मेडिकल कराने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा। बाल कल्याण निदेशालय के साथ ही लड़कियों के हंगामे को देखते हुए पुलिस अधीक्षक को भी सुरक्षा के लिए महिला सिपाही उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन समय पर सुरक्षाकर्मी उपलब्ध नही कराया गया। इसी का फायदा उठाकर किशोरियां फरार हो गईं।

बदनाम एरिया से बरामद हुईं थीं लड़कियां

बाल गृह बालिका से फरार किशोरियां इलाहाबाद के बदनाम गली से 18 नवंबर को मिलीं थीं। जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्रा ने बताया कि एक एनजीओ ने पुलिस के सहयोग से इलाहाबाद के बदनाम इलाके से 22 लड़कियों को पकड़ा था।

वहां बाल गृह में स्थान न होने के कारण सभी को आगरा भेज दिया गया। वहां जांच के बाद आठ लड़कियों को रोक लिया गया। 14 लड़कियों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर आगरा से यहां संस्था द्वारा संचालित बाल गृह बालिका भेज दिया गया।

लड़कियों की हरकत को देखते हुए उन्होंने महानिदेशक को 30 दिसंबर को पत्र लिखा। जिसमें आशंका जताया था कि उन लड़कियों को सरकारी बाल गृह में रखा जाए। पत्र पहुंचने के पहले ही लड़कियां फरार हो गईं।

बोलेरो में बैठकर भागीं लड़कियां!
बाल गृह बालिका से फरार होने वाली 13 लड़कियां कुछ दूर पर खड़ी बोलेरो में सवार होकर भागने में सफल हुईं। मोहल्ले के लोगों की मानें तो रात करीब तीन बजे एक बोलेरो आकर कुछ दूर पर रुकी। उसमें दो लोग बैठे थे। लड़कियां गेट खोलने के बजाय चहरदीवारी कूदकर बाहर निकलीं। वे बोलेरो में बैठ गईं और चालक सदर मोड़ की ओर वाहन लेकर चला गया।
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तेजाब डालने की धमकी से सहमीं मासूम

राजकीय संरक्षण गृह महिला आगरा से भेजी गईं लड़कियों ने मासूम बच्चियों को तेजाब डालने की धमकी देकर खौफजदा कर रखा था। दस दिनों से उनकी हरकतें सहन करने वाली बच्चियां बुधवार को काफी राहत महसूस कर रहीं हैं।

अजीत नगर स्थित बाल गृह बालिका में पहले से ही 14 लड़कियां रह रहीं हैं। 20 दिसंबर को आगरा से 14 लड़कियां फिर भेजी गईं। बाल गृह बालिका के कर्मचारियों की मानें तो लड़कियों ने आते ही अपनी धमक दिखानी शुरू कर दी।

दूसरे दिन से ही भूख हड़ताल करना और पहले से रहने वाली लड़कियों को धमकाना शुरू कर दिया था। इससे परेशान कर्मचारियों ने आगरा से आईं लड़कियों को दूसरे कमरे में रहने का इंतजाम कर दिया गया। इसके बाद भी वे छोटी बच्चियों को धमकाने लगीं कि यहां से बाहर निकलने में उनकी मदद करो वरना सभी के ऊपर तेजाब फेंक दिया जाएगा। इन लड़कियों की धमकी से वे बच्चियां पूरी तरह सहम गईं।

मामले की जानकारी मिलने पर अधीक्षक वंदना ने दूसरी बच्चियों को उन लड़कियों से दूर रखना प्रारंभ कर दिया। हर समय निगरानी करने के लिए कर्मचारी कक्ष के बाहर तैनात रहतीं। अधीक्षक ने बताया कि वे कर्मचारी महिलाओं को भी अपशब्द बोलती रहतीं। 22 दिसंबर को बवाल शांत कराने आईं महिला एसओ पर भी फब्तियां कसने से बाज नही आईं।
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