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सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलते ही संथारा की घोषणा

Mon, 31 Aug 2015 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जयपुर
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें जैन समुदाय की संथारा प्रथा को आत्महत्या बता कर उस पर रोक लगा दी गई थी और उसे अवैध भी बताया गया था।
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मुख्य न्यायधीश एच.एल दत्तू और अमिताभ रॉय की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को भी नोटिस भेजी है।

वहीं जैन समाज की प्रथा संथारा (संलेखना) को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगते ही सोमवार को बीकानेर से संथारा लेने की घोषणा हो गई है।

बांटी मिठाइयां

बीकानेर के गंगाशहर से 83 वर्षीय बदनी देवी डागा ने ये घोषणा की। इधर, उच्चतम न्यायालय ने जैसे ही उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई, राजस्थान के जैन समाज ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई।

बदनी देवी डागा के पुत्र किरण चंद डागा ने बताया कि 46 दिन पहले उनकी मां ने तपस्या शुरू की थी और पूरी होने के बाद जब उन्हें भोजन परोसा गया, तब उन्होंने संथारा लेने की बात की।

इस बीच राजस्थान उच्च न्यायालय ने संथारा पर रोक लगा दी, इस कारण संथारा की  घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक से उन्हे घर-परिवार में उत्सव का सा माहौल है।

क्या है संथारा प्रथा

उन्होंने कहा कि पूरा परिवार खुश है और जश्न मना रहा है कि उनकी मां मुक्ती के मार्ग पर चल पड़ी हैं। बदनी देवी के परिवार का पापड़ व गुजिया बनाने का व्यापार है।

ये जैन धर्म की सबसे पुरानी प्रथा मानी जाती है। संथारा के जरिए देह त्यागने को बहुत पवित्र माना जाता है। इसमें व्यक्ति खाना-पीना त्याग कर अपने को एक कमरे तक सीमित कर लेता है।

जैन समाज में इसका अर्थ माना जाता है कि जीवन के अंतिम समय में तप-विशेष की आराधना करना। इसे जीवन की अंतिम साधना भी माना जाता है। जैन समाज में इसे महोत्सव भी कहा जाता है।
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पूरा जैन समाज उतरा था विरोध में

उच्च न्यायालय ने आत्महत्या की श्रेणी का मानते हुए संथारा पर 10 अगस्त को रोक लगा दी थी। इसके बाद धर्म बचाओ आंदोलन के तहत जैन समाज के जैन साधु-संतों को शामिल करते हुए प्रमाण सागर महाराज के सानिध्य में दिगम्बर एवं श्वेताम्बर संतों व समाज की संयुक्त रूप से समिति बनाई गई थी।

इस समिति के आह्वान पर राष्ट्र स्तरीय मौन जुलूस निकाला गया था।समिति के मुख्य समन्वयक राजेन्द्र कुमार गोधा ने कहा कि संथारा जैन समाज का मूल आधार है और इसे आत्महत्या की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है। उच्चतम न्यायालय की ओर से उच्च न्यायालय के आदेश पर लगी रोक से जैन समाज में हर्ष का माहौल है।

पूरा समाज आपस में मिठाइयां बांट रहा है।समिति के संयोजक सुभाष चन्द जैन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में जैन समाज अपना पक्ष रखने के लिए तैयार है और इस पवित्र प्रथा पर पूरा जैन समाज एक है।प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि जैन समाज अदालत के आदेशों का सम्मान करता है, लेकिन इस मसले पर विधि विशेषज्ञों से भी राय मशवरा करके उच्चतम न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
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