केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट की फजीहत के बावजूद इस्तीफा नहीं देने के फैसले पर आमादा सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा को सभी जिम्मेदारी से मुक्त करने विकल्प पर विचार कर रही है।
कार्मिक सचिव और गृह सचिव ने सरकार को सुझाया है कि रंजीत सिन्हा के कार्यकाल के बचे दस दिन के लिए कामकाज की जिम्मेदारी एजेंसी के नंबर-2 विशेष निदेशक अनिल सिन्हा को सौंपी जा सकती है। रंजीत सिन्हा को टूजी जांच से हटाने के आदेश के बाद सरकार पर सीबीआई की साख बचाने का जबरदस्त दबाव है।
सरकार की मुसीबत है कि चौतरफा निंदा के बावजूद सिन्हा खुद इस्तीफा नहीं दे रहे। सीबीआई निदेशक पद की निश्चित अवधि होने की तकनीकी वजह से सरकार कानूनी तौर पर उन्हें जबरन हटा भी नहीं सकती। ना ही उन्हें लंबी छुट्टी पर जाने को कहा जा सकता है। सरकार सिन्हा के बचे कार्यकाल के गुजर जाने का इंतजार कर रही थी। लेकिन किसी निदेशक को ही जांच से दूर रहने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद सरकार पर उदासीन रहने के आरोप लगने लगे हैं।
सरकार की दूसरी मुसीबत है कि बिना लोकपाल कानून में संशोधन किए नए सीबीआई निदेशक की नियुक्ति में बड़ी अड़चन है। हालांकि 24 नवंबर से शुरु होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार सीबीआई नियुक्ति पैनल में विपक्ष के नेता की अनिवार्यता संबंधी अड़चन को दूरकरने के लिए संशोधन लाने की कोशिश कर रही है। लेकिन राज्यसभा में वोट के समीकरण के मद्देजनर यह उतना आसान नहीं होगा।
गौरतलब है कि मौजूदा लोकसभा में कांग्रेस के पास इतनी भी सीटें नहीं है कि उसे विपक्ष के नेता का पद मिले। सरकार के पास संशोधन के लिए सिर्फ दस दिन है क्योंकि सिन्हा का कार्यकाल 2 दिसंबर तक ही है। ऐसे में सीबीआई निदेशक की नियुक्ति कुछ दिन के लिए अटक सकती है। इस वजह से भी सीबीआई का कार्यभार अनिल सिन्हा को सौंपा जा सकता है।