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फांसी की सजा के पक्ष में नहीं हैं रामगोपाल यादव

Thu, 14 Feb 2013 09:21 PM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
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भले ही समाजवादी पार्टी ने अफजल गुरू की फांसी का औपचारिक तौर पर समर्थन किया है। मगर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव रामगोपाल यादव निजी तौर पर मृत्युदंड के प्रावधान के समर्थन में नहीं है। समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा है कि मृत्युदंड की सजा नहीं होना चाहिए क्योंकि कई बार फांसी हो जाती है और बाद में पता चलता है कि वह निर्दोष है।
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गौरतलब है कि अफजल की फांसी के तुरंत बाद सपा महासचिव राम आसरे कुशवाहा ने कहा था कि अफजल को फांसी देर से मिली है। मगर बृहस्पतिवार को रामगोपाल यादव ने अमर उजाला से कहा कि राजनीति विज्ञान के छात्र के नाते मेरा मानना है कि मृत्युदंड की सजा नहीं होनी चाहिए। लेकिन यह मेरे निजी विचार है।

ट्रायल के दौरान कई बार गलतियां हो जाती हैं या फिर बाद में कुछ नए तथ्य सामने आते हैं। मगर एक बार मृत्यु दंड दिए जाने के बाद गलती को दुबारा सुधारा नहीं जा सकता। गैलीलियो ने कहा था कि पृथ्वी सूरज के चारों ओर चक्कर लगाती है। उस समय  लोगों ने माना कि यह ईशनिंदा है। जिसके लिए उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया। बाद में मानव जगत को अहसास हुआ कि गैलीलियो सही थे।
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वे आगे कहते हैं कि इसी तरह सुकरात को अपने लोगों के हाथ से जहर का प्याला अपने सच्चे विश्वासों के लिए पीना पड़ा। वहीं ईसा मसीह को भी सूली पर चढ़ा दिया गया। उस समय दो लोगों को सजा मिली थी। एक अपराधी था और एक ईसा मसीह। रोम के राजा को अधिकार था कि वह दोनों में से किसी एक को माफ कर दें। उन्होंने अपराधी को माफ कर दिया। वहीं ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया था।

यादव कहते है कि फांसी को लेकर यह देखा जाना चाहिए कि अपराध कितना गंभीर है, क्योंकि अपराधी को कुछ मिनट की ही तकलीफ झेलनी पड़ती है। इसके बजाय ऐसे अपराधियों को उम्र कैद की सजा सुनाई जानी चाहिए, जिससे वे सालों तक सजा को महसूस कर सके।
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