भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की बदहाली पर राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र पर भी निशाना साधा है।
रविवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर राजनाथ ने केंद्र पर गन्ना किसानों के साथ-साथ अन्य किसानों से भी भेदभाव का आरोप लगाया।
पत्र में उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि न तो गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी की गई और न ही पिछले साल का 2300 करोड़ रुपये का बकाया ही किसानों को दिया गया।
भाजपा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने के साथ ही चेतावनी दी है कि अगर किसानों को उचित लागत मूल्य नहीं मिला तो देश की खाद्य सुरक्षा भविष्य में खतरे में पड़ जाएगी।
पत्र में राजनाथ ने उत्तर प्रदेश में बीते एक माह से जारी गन्ना किसानों के आंदोलन और इसके संदर्भ में राज्य सरकार की उदासीनता की निंदा की है।
पत्र में कहा गया है कि राज्य के किसानों की मांग उचित है। मगर इस पर न तो केंद्र संवेदनशील है और न ही राज्य सरकार। न तो किसानों को पिछले साल का पूरा भुगतान मिला है। और न ही इस साल खरीद शुरू हो पाई है। इसलिए किसान गन्ने की फसल के बाद अगली फसल लगाने के बारे में सोच भी नहीं पा रहे।
इसी पत्र में राजनाथ ने लगे हाथों केंद्र की कथित किसान विरोधी नीति की जमकर आलोचना की। बीते कुछ सालों में गेहूं और चावल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि को बेहद मामूली बताते हुए राजनाथ ने इसे केंद्र सरकार की किसानों के प्रति लापरवाही करार दिया।