सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि बलात्कार मामले में पीड़िता के शरीर पर बाहरी और अंदरूनी चोट नहीं होने के आधार पर आरोपी को जमानत दिया जाना गलत है।
अदालतें संशोधित कानून की परिभाषा को ध्यान में रखकर ही ऐसे मामलों में आदेश जारी करें। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकार लगाते हुए निचली अदालतों को यह हिदायत दी है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से इस मसले पर जवाब तलब किया है।
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम्, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई व जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने नाबालिग की मां की ओर से दायर याचिका पर आरोपी अर्जुन उर्फ रामनिवास को जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से आरोपी को जमानत देने का आदेश पूरी तरह से गलत है क्योंकि पीड़िता के शरीर पर बाहरी-अंदरूनी चोट होने का आधार बलात्कार की परिभाषा से परे है।
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पीठ ने आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की याचिका को अनुमति प्रदान करते हुए राज्य सरकार व आरोपी को नोटिस जारी किया। अदालत ने प्रतिपक्षों से इस मसले पर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि बलात्कार के खिलाफ कानून में संशोधन किया जा चुका है। अब संशोधित कानून को ध्यान में रखते हुए अदालतें कोई भी आदेश जारी करने में सतर्कता बरतें।
याद रहे कि गत वर्ष दिल्ली में चलती बस में एक लड़की के साथ हुए गैंगरेप के बाद देशभर में बलात्कार के कानून को सख्त किए जाने की मांग पर सरकार ने इसमें संशोधन किया था।
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पीठ ने कहा कि अदालतें संशोधित कानून के प्रावधानों के मुताबिक ही बलात्कार के मसलों पर आदेश दें। इससे याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने 9 जुलाई में मेरी मुवक्किल की 15 वर्षीय बेटी के साथ बंदूक के बल पर बलात्कार करने वाले आरोपी को पीड़िता के शरीर पर चोट न होने आधार पर जमानत दे दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि चिकित्सकीय रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर कोई बाहरी व अंदरुनी चोट नहीं है। ऐसे में आरोपी को जमानत प्रदान किया जाना ही ठीक है। सर्वोच्च अदालत ने इस तर्क पर सहमति जताते हुए कहा, राज्य सरकार और आरोपी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
यूपी के अलीगढ़ जिले में नाबालिग के साथ गत वर्ष मई में बलात्कार किया गया था। इस कुकृत्य में आरोपी व उसका एक साथी शामिल था। सेशन कोर्ट ने आरोपी व सह-आरोपी की जमानत याचिका को तत्काल खारिज कर दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी को जमानत प्रदान कर दी।