पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। खासकर चुनावों से ठीक पहले बनी राहुल की नई टीम के लिए भी परीक्षा की घड़ी है।
उपाध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद हुए विधानसभा चुनावों के लिए राहुल ने कुछ नए प्रयोग भी किए। मगर राहुल की टीम में शामिल नए और पुराने सिपहसलारों के बीच तालमेल की जरूरत की बात पार्टी के एक तबके ने दबे स्वर में जाहिर की।
पार्टी उपाध्यक्ष के कई नए फार्मूलों को लेकर भ्रम का माहौल भी रहा। अब जब चुनाव नतीजों का दिन रविवार नजदीक आ गया है तो ऐसे में यह देखने की बात है कि राहुल के यह प्रयोग आखिर कितने सफल रहे।
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राहुल की नई टीम में कई नए कांग्रेसी नेताओं को पहली बार संगठन में बड़े पद पर बैठाकर नई जिम्मेदारियां दी गईं। कइयों को स्क्रीनिंग कमेटी समेत चुनाव से संबंधित कई बड़ी समितियों में शामिल भी किया गया।
राहुल ने कुछ नए फार्मूलों को बनाकर टिकट बंटवारे के मानदंड तय कर दिए। इसे लेकर पार्टी के एक तबके का कहना है कि राहुल की टीम में नए और पुराने सिपहसलारों के बीच भ्रम देखने को मिला।
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कई जगह बड़े नेताओं और जातिगत समीकरणों के चलते राहुल के मानदंडों की अनदेखी करनी पड़ी, जिससे पांच राज्यों के चुनावों में भ्रम का माहौल पैदा हो गया। एक राज्य में टिकट बांटने का कुछ और नियम तो दूसरे राज्य में अलग मानदंडों को लेकर नेताओं के बीच जबरदस्त भ्रम का माहौल रहा।
राहुल गांधी ने तय किया था कि लगातार दो बार चुनाव हारने वाले या फिर 15 हजार से ज्यादा वोटों से हारे उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया जाएगा। इसे लेकर पार्टी की बैठकों में नए और पुराने सदस्यों के बीच आपसी मतभेद उठे।
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सूत्रों के मुताबिक राजस्थान में कई सीटों पर जातीय समीकरण और पुराने नेताओं के दबाव में आकर मानदंडों को अनदेखा किया गया। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रभान सिंह को टिकट दी गई। जबकि वह दो बार लगातार चुनाव हारे थे।
राहुल के मानदंड तोड़ने की मांग हुई
राजस्थान में ओसियान विधानसभा सीट से जेल में बंद मलखान सिंह की 82 साल की मां को टिकट दिया गया। इसी तरह के कई टिकट बांटे गए। राजस्थान में इस तरह के टिकट बांटने से दूसरे राज्यों में भ्रम फैल गया। इससे दूसरे राज्यों के कांग्रेस के कार्यकर्ता भी निराश हुए। राहुल के मानदंडों को तोड़ने की मांग की गई। नहीं मानने पर कई सीटों पर बागी उम्मीदवार खड़े होने की बात है।
राहुल के मानदंड के मुताबिक बंटे टिकट
हालांकि पार्टी राहुल के तय मानदंडों को सख्ती से लागू करने की बात करती है। कांग्रेस प्रवक्ता पी सी चाको कहते है कि पार्टी ने राहुल गांधी के मानदंडों को लागू किया है। कुछेक जगहों को छोड़कर पार्टी ने तय मानदंड के मुताबिक ही टिकट बांटे है। मगर दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में कई बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिया गया।
दूसरी पार्टी से आए नेताओं को टिकट
दिल्ली में तो एक दिन पहले दूसरी पार्टी से आए नेताओं को टिकट दिया गया। इस तरह के माहौल से पार्टी को नुकसान होने की बात कही जा रही है। अपने समर्थकों और नाते रिश्तेदारों को टिकट देने के लिए बड़े नेताओं की जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी पुराने नेताओं को ऐतराज रहा।