भारत को एटमी ताकत से नवाजने वाले बच्चों के प्यारे पूर्व राष्ट्रपति मिसाइलमैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं रहे। डॉक्टर कलाम 2002 से 2007 तक देश के 11 वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति होने का जैसे मतलब ही बदल दिया था। वे राष्ट्रपति और राष्ट्रपति भवन को लोगों के करीब लेकर आए।
राजनीतिक तौर पर राष्ट्रपति के रूप में भी उनका कार्यकाल खासा प्रभावी रहा। राष्ट्रपति पद की कुर्सी संभालने के एक महीने बाद ही उन्होंने सरकार की तरफ से लाए गए चुनाव सुधार विधेयक को वापस कर दिया। मतलब ये कि रबर स्टाम्प माने जाने वाले पद को एक अलग तरह से उन्होंने परिभाषित किया। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने देश के हर एक राज्य का दौरा किया।
कलाम स्वभाविक तौर पर एक शिक्षक, एक वैज्ञानिक थे लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति पद पर एक परिपक्व राजनेता की तरह छाप छोड़ी। जिस तरह वे राष्ट्रपति दरबार को आम जनता के करीब लाए, वो बाकी राष्ट्रपतियों के लिए भी एक उदाहरण बन गया। डॉक्टर कलाम का मानना था कि असल प्रतिभाएं ग्रामीण भारत में बसती हैं और उन्हें निखारने की जरूरत है।
गांव को देश के विकास की धुरी से जोड़ने का उनका एक सपना था। राष्ट्रपति पद से रिटायर्ड होने के बाद भी लोगों के लिए वे प्रेरणास्रोत बने रहे। अंतिम समय तक वो लगातार सक्रिय रहे और ज्ञान की अलख जगाने का काम करते रहे।