कांग्रेस में भले ही प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग हो रही हो लेकिन उनके सक्रिय राजनीति में आने की संभावना नहीं है। पार्टी मामलों में भी वह सक्रिय भूमिका नहीं निभाएंगी। राहुल गांधी संसद के बाहर और भीतर पार्टी का चेहरा बने रहेंगे।
अंदरूनी सूत्रों का कहना है प्रियंका गांधी पार्टी की राजनीति में निकट भविष्य में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाने जा रही हैं। सोनिया के साथ मिलकर राहुल गांधी ही पार्टी को दिशा देते रहेंगे। गांधी परिवार के किसी तीसरे सदस्य के लिए इसमें जगह नहीं है।
माना जा रहा है कि प्रियंका की ओर से लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान लगातार दस दिनों तक नरेंद्र मोदी के खिलाफ हमलावर रुख अपनाना पार्टी के लिए महंगा ही साबित हुआ।
भाई का भला नहीं कर पाईं प्रियंका
मोदी के खिलाफ उनके हमले ज्यादातर बचकाना थे और उनमें कोई दम भी नहीं था। उनके सक्रिय होने से पार्टी के प्रमुख चेहरा राहुल गांधी पृष्ठभूमि में चले जाते थे। मीडिया का पूरा ध्यान प्रियंका पर चला जाता था। अपने भाई का भी वह कोई भला नहीं कर पाईं। अमेठी में वह राहुल के समर्थन में उतरीं लेकिन 2009 के मुकाबले उनकी जीत का अंतर कम हो गया।
यह भी दिलचस्प है कि प्रियंका ने चुनाव अभियान के दौरान अपनी निजी जिंदगी और पति रॉबर्ट वाड्रा पर हमले के आरोप लगाए थे। लेकिन जमीन सौदे और निजी कंपनियों से वाड्रा के संबंधों के आरोपों पर अब तक उन्होंने कोई सफाई नहीं दी है।
पिछले कुछ साल में वाड्रा की निजी संपत्ति जिस रफ्तार से बढ़ी है, उस पर भी प्रियंका की ओर से कोई सफाई नहीं आई है। इससे वाड्रा का बचाव करने में वह कमजोर पड़ गई हैं।
कांग्रेस की हार के लिए कौन जिम्मेदार?
पार्टी नेताओं का मानना है कि मीडिया के सामने कुछ समय तक आना और सक्रिय राजनीति में हिस्सा लेना अलग-अलग चीजें हैं। एक बार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने पर न सिर्फ आप अपने बल्कि अपने रिश्तेदारों के काम के प्रति भी जवाबदेह हो जाते हैं। मीडिया और आम लोगों की निगाह से बचना मुश्किल होता है।
पार्टी के एक और नेता का कहना है कि राहुल गांधी की निजी जिंदगी किसी सवाल के घेरे में नहीं है। उनका सब कुछ खुला है। वह राजनीतिक तौर पर अपरिपक्व हो सकते हैं या चापलूसों से घिरे हो सकते हैं। लेकिन काम के प्रति गंभीर हैं।
पिछले कुछ अरसे में पार्टी के कई नेता प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाने के लिए जोर देते रहे हैं। हाल में यह मांग पूर्व केंद्रीय मंत्री केवी थॉमस ने उठाई थी। लेकिन उनकी इस मांग को समर्थन नहीं मिला। उनके राज्य के सहयोगी और पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी ने भी उनकी मांग का समर्थन नहीं किया। एंटनी ने कहा कि हार के लिए राहुल को अकेले जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए पार्टी के नेता सामूहिक तौर पर जिम्मेदार हैं।
मोदी के खिलाफ इसलिए नहीं उतरीं प्रियंका
पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र का कहना है कि सचाई तो यह है कि प्रियंका गांधी ने वाराणसी में मोदी के खिलाफ उतरने का मन बना लिया था।
लेकिन पर्चा दाखिल करने के दौरान भरे जाने वाले शपथ पत्र में पति या पत्नी समेत पूरे परिवार की संपत्ति का खुलासा करना पड़ता है।
इससे प्रियंका को वाड्रा की संपत्ति का खुलासा करना पड़ता। यही वजह है कि पार्टी ने उनको वाराणसी में नहीं उतारा।