प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली विदेश यात्रा के बाद पर्यटकों की दिलचस्पी भूटान में बढ़ने लगी है। हिमालय की गोद में अनूठी बौद्ध संस्कृति को संजोए इस देश में भारतीय पर्यटकों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।
विकास की अंधी दौड़ से खुद को अलग कर ग्रॉस डोमेस्टिक हैप्पीनेस (जीडीएच) यानी खुशहाली के पैमाने पर तरक्की मापने वाला भूटान अपनी तमाम खूबियों के चलते पर्यटकों को लुभा रहा है।
भूटान में टूरिज्म की बढ़ती संभावनाओं को भुनाने के लिए मेकमाईट्रिप डॉट कॉम जैसे ट्रैवल पोर्टल मैदान में उतर चुके हैं।
टूर पैकेज की मांग करीब दोगुना बढ़ गई
वर्ष 2011 से टूरिज्म काउंसिल ऑफ भूटान (बीटीसी) के साथ काम रही कंपनी मेकमाईट्रिप डॉट कॉम के प्रवक्ता ने बताया कि नरेंद्र मोदी की पहली विदेश यात्रा के बाद भूटान के टूर पैकेज की मांग करीब दोगुना बढ़ गई है।
आमतौर पर भूटान में पीक सीजन मार्च से जून के बीच होता है, लेकिन इस साल अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बुकिंग पिछले साल से करीब तीन गुना ज्यादा है। गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों से भूटान के बारे में पूछताछ काफी बढ़ी है।
दीपावली की छुट्टियों में भी बुकिंग
भूटान में टूरिज्म कारोबारी राजू राय बताते हैं कि इस साल अक्टूबर के पहले हफ्ते में कई छुट्टियां एक साथ होने से भूटान के अधिकांश होटल भर चुके हैं। इसी दौरान यहां विख्यात थिंपू फेस्टिवल भी होता है। दीपावली की छुट्टियों में भी भारत से काफी पर्यटन यहां आ रहे हैं।
राय के मुताबिक, भूटान की तरफ पर्यटकों का रुझान बढ़ने की कई वजह हैं। यहां आने के लिए भारतीयों को पासपोर्ट की जरूरत नहीं है। भारत की करेंसी यहां भी चलती है।
खान-पान और भाषा को लेकर भी यहां भारतीयों को कोई समस्य नहीं है। इस तरह अपेक्षाकृत कम खर्च में इंटरनेशनल टूरिज्म का अनुभव मिलता है।
मुंबई, दिल्ली और कोलकाता से सीधी उड़ान
पर्यटकों की बढ़ती तादाद को देखते हुए मई में मुंबई से भूटान के बीच सीधी विमान सेवा शुरू हुई है, जो सप्ताह में दो बार है। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी से भी भूटान की नियमित उड़ानें हैं।
लेकिन भूटान में सिर्फ ड्रुक और ताशी दो ही एयरलाइंस हैं।
इसलिए हवाई टिकट महंगा और समय पर टिकट मिलना मुश्किल हो सकता है। मेकमाईट्रिप डॉट कॉम पिछले तीन साल से भूटान टूरिज्म, ड्रुक एयरलाइंस और स्थानीय होटल के साथ मिलकर भूटान के टूर पैकेज दे रहा है, जो आपके लिए किफायती हो सकता है।
क्षेत्र हरियाणा जितना, आबादी सिर्फ 7 लाख
भारत के लोगों के लिए भूटान किसी स्वप्नलोक से कम नहीं है। इसका क्षेत्र हरियाणा से थोड़ा ही कम है लेकिन पूरे देश में सिर्फ 7.4 लाख लोग रहते हैं। इनमें भी एक चौथाई आबादी राजधानी थिंपू में है।
यहां 2008 में पहली बार चुनाव हुए और अब युवा राजा के साथ एक लोकतांत्रिक सरकार देश चलाती है। प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य का पूरा जिम्मा सरकार उठाती है।
तकरीबन हर परिवार के पास अपना घर और खेती की जमीन है। पूरे देश में सिर्फ 21 कंपनी यहां के स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है।