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अध्यादेश मसले पर राष्ट्रपति ने मोदी सरकार पर उठाई उंगली

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मोदी सरकार के करीब आठ महीने के कार्यकाल में नौ अध्यादेश लाने के मुद्दे पर चल रही बहस के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सरकार और विपक्ष दोनों को ऐसी स्थिति से बचने की नसीहत दी है।
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राष्ट्रपति ने सरकार को ‘अध्यादेश राज’ से बचने का सीधा संदेश दिया है। साथ ही उन्होंने विपक्ष को भी कड़ा संदेश देते हुए कह दिया है कि अल्पमत का विपक्ष बहुमत की आवाज को अकारण बाधित नहीं कर सकता।

सोमवार को केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के प्राध्यापकों और छात्रों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 16वीं लोकसभा में शासन और स्थिरता के लिए बहुमत मिला है। आए दिन अध्यादेश जारी करने से बचने के लिए दोनों को आपस में मिल बैठकर कोई व्यवहारिक समाधान निकालना चाहिए।
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प्रणब मुखर्जी ने विधेयकों को पास कराने के लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाने के विकल्प को भी अव्यवहारिक बताया। ऐसा कहकर उन्होंने मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
 
हर छोटे बड़े फैसलों को लेकर अध्यादेश की राह पर चल पड़ी मोदी सरकार पर देश की संसद को बौना करने के आरोप लग रहे हैं जबकि विपक्ष पर भी संसद के कामकाज को बाधित करने के आरोप लग रहे हैं। सरकार और विपक्ष दोनों के लिए राष्ट्रपति की यह हिदायत काफी मायने रखती है। संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष के हंगामे के चलते कई दिनों तक संसद का कामकाज ठप पड़ा रहा। बाद में सरकार ने बीमा, कोयला, भूमि अधिग्रहण समेत तमाम मसलों को लेकर अध्यादेश लाने का फैसला कर लिया।

India’s diversity & magnitude of problems requires Parliament to be effective platform to build consensus #PresidentMukherjee #NYmsg— President of India (@RashtrapatiBhvn) January 19, 2015

संसद की कार्यवाही रोकने पर विपक्ष को भी दी नसीहत

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैंने राजनीतिक प्रतिष्ठान से कहा है कि वे आपस में बातचीत करें और अपने मतभेदों को सुलझाएं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अध्यादेश लाने जैसे प्रावधान केवल असाधारण परिस्थितियों के लिए ही हों।’ साथ ही उन्होंने विपक्ष द्वारा कामकाज में बाधा डालने को भी गलत बताया।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि व्यवधान डालना संसद के कामकाज का तरीका नहीं है। हंगामे के कारण दूसरे सांसद अपनी बात नहीं रख पाते हैं। संसद को चलाने में सत्तारूढ़ दल की बड़ी भूमिका है और उसे इसकी पहल करनी चाहिए।

साथ ही विपक्ष का सहयोग देना चाहिए। मुखर्जी ने कहा कि सरकार अध्यादेश जारी करती है, लेकिन साथ ही वह छह महीने की अधिकतम सीमा के अंदर दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में मंजूर नहीं करवा पाने की स्थिति में उसके खत्म होने का भी जोखिम लेती है।

7 महीने, 9 अध्यादेश
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (संशोधन) अध्यादेश, 2014
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अध्यादेश
कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अध्यादेश
टेक्सटाइल अंडरटेकिंग (नेशनलाइजेशन) कानून
कोयला खदान (विशेष प्रावधान) दूसरा संशोधन अध्यादेश
बीमा कानून (संशोधन) अध्यादेश
भूमि अधिग्रहण (संशोधन) अध्यादेश
नागरिकता (संशोधन) अध्यादेश
मोटर वाहन (संशोधन)

First three Lok Sabhas had 677, 581 & 578 sittings; 13th, 14th & 15th Lok Sabhas only 356, 332 & 357 sittings #PresidentMukherjee #NYmsg— President of India (@RashtrapatiBhvn) January 19, 2015

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अल्पमत विपक्ष के शोर में न दबे बहुमत की आवाज

क्या है अध्यादेश
भारत के संविधान का अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार देता है। संसद सत्र नहीं चलने के दौरान अगर ऐसी परिस्थितियां बनती है, जिसमें तुरंत कार्रवाई की जरूरत है, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है। हालांकि इसे कानून का रूप देने के लिए जल्द से जल्द संसद का सत्र बुलाना होता है।

इंदिरा सरकार में आए सबसे ज्यादा अध्यादेश
अध्यादेश के जरिए महत्वपूर्ण बिल पास करवाने की परंपरा संविधान लागू होने के साथ ही पड़ गई थी। हालांकि 1971-77 के बीच इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए कुल 99 अध्यादेश लाए गए। इसके बाद 1991-96 में नरसिम्हा राव सरकार और 1996-98 वाजपेयी, देवगौड़ा और गुजराल के कार्यकाल में 77-77 बिल लाए गए।

सुप्रीम कोर्ट भी जता चुका आपत्ति
90 के दशक में बिहार के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कार्यपालिका को अध्यादेश जारी करने की अपनी शक्तियों का इस्तेमाल अपवाद के रूप में ही करना चाहिए।

मनमोहन सरकार में महज 61 अध्यादेश
‘अध्यादेश राज’ के मामले में मनमोहन सिंह के दोनों कार्यकाल काफी बेहतरीन रहे। यूपीए-1 और यूपीए-2 के दौरान कुल 61 अध्यादेश लाए गए।

Constitution confers limited power upon Executive for Ordinances to meet exigencies #PresidentMukherjee #NYmsg— President of India (@RashtrapatiBhvn) January 19, 2015


Parliament exercises oversight; ensures progs. carried out by Executive legal, effective & for intended purpose #PresidentMukherjee #NYmsg— President of India (@RashtrapatiBhvn) January 19, 2015
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