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असहिष्णुता एवं हिंसा लोकतंत्र के खिलाफ: राष्ट्रपति

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हाल के दिनों में देश में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में वृद्धि के बीच राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बृहस्पतिवार कहा कि असहिष्णुता एवं हिंसा लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और आर्थिक, सामाजिक या किसी भी तरह की प्रगति शांति एवं अहिंसा के बिना संभव नहीं है।
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मुखर्जी ने 68वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में भड़काऊ भाषणों पर चिंता जताते हुए कहा कि प्राचीन सभ्यता होने के बावजूद भारत नए सपनों से युक्त आधुनिक राष्ट्र है।

असहिष्णुता और हिंसा लोकतंत्र की मूल भावना के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि जो लोग उत्तेजित करने वाले, भड़काऊ और जहरीले भाषणों में विश्वास करते हैं, उन्हें भारत के मूल्यों की समझ नहीं है।
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राष्ट्रपति ने कहा कि भारत लोकतंत्र, संतुलन, अंतर एवं अंत: धार्मिक समरसता की मिसाल है। हमें अपने पंथनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा करनी होगी।

कट्टरवाद पर बोले राष्ट्रपत‌ि

एशिया और अफ्रीका के कुछ देशों में जारी कट्टरवाद और भारत पर इसके दुष्परिणामों का उल्लेख करते हुए मुखर्जी ने कहा कि ये लड़के धार्मिक विचारधारा पर आधारित भौगोलिक सत्ता कायम करने के लिए नया नक्शा खींचने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे भारत खारिज करता है।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी सुरक्षा तथा विदेश नीतियों में कूटनीति की कोमलता के साथ ही फौलादी ताकत का समावेश करना होगा। उन्होंने भारत की युवा शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 68 वर्ष की आयु में एक देश बहुत युवा होता है।

हमारे पास 21वीं सदी पर वर्चस्व कायम करने के लिए इच्छाशक्ति, ऊर्जा, बुद्धिमता, मूल्य और एकता मौजूद है।

महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर व‌िशेष

राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था को विकास का भौतिक हिस्सा और शिक्षा को उसका आत्मिक हिस्सा बताते हुए कहा कि ठोस शिक्षा प्रणाली किसी भी प्रबुद्ध समाज का आधार होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 12 पंचवर्षीय योजना के अंत तक देश 80 प्रतिशत की साक्षरता दर प्राप्त कर चुका होगा।

हालांकि उन्होंने सवाल खड़े किए कि क्या हम यह कह पाएंगे कि हमने अच्छा नागरिक तथा सफल पेशेवर बनने के लिए अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा कौशल प्रदान किए हैं।

मुखर्जी ने पर्यावरण के प्रति सरकार के सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर 2019 तक भारत को स्वच्छ राष्ट्र बनाने का प्रधानमंत्री का आह्वान सराहनीय है।
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और इंतजार नहीं कर सकता गरीब

राष्ट्रपति ने कहा कि गरीबी के अभिशाप को समाप्त करना एक निर्णायक चुनौती है। अब नीतियों को गरीबी के उन्मूलन से गरीबी के निर्मूलन की दिशा में केंद्रित होना होगा।

मुखर्जी ने आर्थिक विकास से होने वाले लाभ को निर्धन से निर्धनतम व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि निर्धन अब और इंतजार नहीं कर सकता।

देश की अर्थव्यवस्था के सात से आठ प्रतिशत की उच्च विकास दर से बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है, जो समतापूर्ण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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