वर्ष 2004 में केंद्र में कांग्रेस की जीत के बाद प्रणब मुखर्जी भी प्रधानमंत्री बनने की होड़ में थे लेकिन बाजी मनमोहन सिंह के हाथ लगी। इस वक्त राष्ट्रपति प्रणब दा पीएम पद के लिए और एक बार प्रमुख दावेदार के तौर पर उभरे थे।
वीपी सिंह सरकार के पतन के बाद साल 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन चाहते थे कि प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री बनें लेकिन राजीव गांधी कुछ और ही सोच रहे थे।
प्रणब के बदले उन्होंने चंद्रशेखर का समर्थन किया था। यह दावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गांधी परिवार के वफादार रहे माखनलाल फोतेदार ने अपनी किताब ‘द चिनार लीव्ज’ में किया है। फोतेदार ने अपनी इस किताब में लिखा है कि 1990 में वीपी सिंह के इस्तीफे के बाद पैदा राजनीतिक स्थिति के बारे में मशविरा के लिए उन्होंने राष्ट्रपति वेंकटरमन से मुलाकात की।
इस दौरान राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि राजीव को मुखर्जी का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने लिखा है, ‘मैंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वह अगली सरकार का नेतृत्व करने के लिए राजीव को आमंत्रित करें क्योंकि वह लोकसभा में अकेले सबसे बड़े दल के नेता थे। इस पर राष्ट्रपति ने मुझे जोर देते हुए कहा कि मुझे राजीव गांधी को यह बताना चाहिए कि अगर वह प्रधानमंत्री पद के लिए प्रणब मुखर्जी का समर्थन करते हैं तो वह उसी शाम उन्हें पद की शपथ दिला देंगे।
राष्ट्रपति ने चंद्रशेखर के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की थी। हालांकि राजीव ने चंद्रशेखर का समर्थन किया था। चंद्रशेखर कई साल से पीएम बनने का सपना देख रहे थे और मौका मिलते ही उन्होंने इसे हासिल कर लिया।
मनमोहन को पीएम बनाने पर नाराज थे कांग्रेस नेता
हार्पर कॉलिन्स से प्रकाशित फोतेदार की किताब जल्द ही बाजार में आने वाली है। इंदिरा गांधी के पूर्व सहायक फोतेदार ने किताब में बताया है कि प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा पालने वाले माधवराव सिंधिया ने वर्ष 1999 में एक वोट से वाजपेयी सरकार के गिरने के बाद कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को समर्थन देने के बारे में मुलायम सिंह यादव की राय बदलने के लिए किस तरह अमर सिंह का इस्तेमाल किया था।
वाजपेयी सरकार के गिरने के बाद प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर सोनिया की ओर से मनमोहन सिंह का नाम लिए जाने के बारे में फोतेदार ने किताब में लिखा है ‘पार्टी में कई लोगों को जब पता चला कि सोनिया जी की पहली पसंद डॉ. सिंह हैं तो कुछ लोग नाराज हो गए।'
दिलचस्प बात यह है कि सोनिया गांधी की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए दावेदारी के पद में मनमोहन सिंह का नाम था। फोतेदार ने उन्हें नाम डालने से मना किया था।
इसलिए बने मनमोहन पीएम
प्रधानमंत्री पद के लिए चुने गए सिख कांग्रेसी मनमोहन सिंह के बारे में फोतेदार ने कहा कि इस पसंद से सोनिया गांधी की ‘चतुर राजनतिक सोच’ का पता चला क्योंकि सिंह का कोई राजनीतिक आधार नहीं था और वह उनके नेतृत्व के लिए कभी खतरा नहीं बन सकते थे।
साथ ही वह सिख समुदाय से संबद्ध थे जो ऑपरेशन ब्लूस्टार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों के कारण गांधी परिवार से बेहद नाराज था।
इस तरह सिखों की कांग्रेस के प्रति नाराजगी कम हुई।