मंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले भाजपा में शामिल कराना और ऊपर से रेल जैसा भारी-भरकम मंत्रालय का कार्यभार सौंपना, कुछ तो खास है सुरेश प्रभु में जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर इतना भरोसा दिखाया है। यह वह भरोसा है जिस पर शायद पिछले रेल मंत्री सदानंद गौड़ा खरे नहीं उतर पाए।
रेलवे प्रधानमंत्री के एजेंडे में किस कदर प्रमुख है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार बनने के कुछ सप्ताह में ही मोदी ने गौड़ा और उनकी टीम के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने अपनी इच्छाओं से अवगत कराया।
रेल बजट में मोदी की इच्छाओं की छाप भी दिखी, लेकिन पांच महीने में गौड़ा ने वह रफ्तार नहीं पकड़ी जिसके प्रधानमंत्री आदी हैं। नतीजा यह हुआ कि गौड़ा का विभाग बदल दिया गया। अब पीएम के रेल एजेंडे को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी प्रभु पर है।
प्रधानमंत्री के एजेंडे में चारों धामों को रेल मार्ग से जोड़ना, हाईस्पीड से लेकर बुलेट ट्रेन, रेलवे यूनिवर्सिटी, ट्रेनों में वाई-फाई और ट्रेनों में साफ-सफाई प्रमुख हैं। रेल बजट में इसकी घोषणा तो हुई, लेकिन सही रफ्तार से काम नहीं हुआ।