गरीबी घटाने के लिए सरकार की आंकड़ों की बाजीगरी पर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।
इस मामले में सरकार को विपक्ष ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों के भी हमले का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्ष ने जहां आंकड़ों की इस बाजीगरी को गरीबों के साथ भद्दा मजाक बताया है, वहीं सहयोगी दल एनसीपी ने गरीबी रेखा निर्धारित करने के योजना आयोग के पैमाने पर सवाल उठाया है।
भाजपा ने तो इस आंकड़े का मजाक उड़ाते हुए कांग्रेस और सरकार को प्रतिदिन 27 रुपये में गुजारा करने की चुनौती दे डाली।
हालांकि कांग्रेस ने योजना आयोग का बचाव करते हुए कहा है कि आंकड़े बताते हैं कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में लोगों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
योजना आयोग ने मंगलवार को वर्ष 2004-05 के मुकाबले वर्ष 2011-12 के दौरान गरीबों की संख्या में 15 फीसदी की कमी आने का दावा किया था।
आयोग ने शहरी क्षेत्र में प्रतिदिन 33.33 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिदिन 27.20 रुपये कमाने वालों को गरीबी रेखा के ऊपर माना है।
योजना आयोग के दावे के 24 घंटे बाद ही देश की सियासत गरमा गई। सहयोगी एनसीपी ने गरीबी तय करने के पैमाने पर सवाल उठाए तो विपक्षी भाजपा और वाम दलों ने सरकार पर गरीबों के साथ भद्दा मजाक करने का आरोप लगाया। हमले की शुरुआत भाजपा ने की।
पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि यूपीए सरकार की नीतियों ने गरीबी बढ़ाई है। मगर सच्चाई को छिपाने के लिए सरकार ने आंकड़ों की बाजीगरी कर दी।
माकपा नेता सीताराम येचुरी यह सरकार अपनी नीतियों से नहीं बल्कि आंकड़ों में हेरफेर कर गरीबी दूर करने में लगी है। माकपा इस आंकड़े को स्वीकार नहीं करेगी। एनसीपी नेताओं प्रफुल्ल पटेल और तारिक अनवर ने भी आंकड़ों पर सवाल खड़ा किया।
इन नेताओं ने कहा कि निश्चित रूप से बीते कुछ वर्षों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है, गरीबी भी कम हुई है। मगर गरीबी निर्धारित करने का योजना आयोग का पैमाना विसंगतियों से भरा हुआ है।
सरकार ने रोजाना के खर्च में महज एक रुपये का बदलाव कर करोड़ों गरीब लोगों को सुविधाओं से वंचित कर दिया। अगर योजना आयोग के आंकड़े सही हैं तो कांग्रेस का एक भी नेता या सरकार का एक भी मंत्री 27.20 रुपये में गुजारा करके दिखाए।--प्रकाश जावडेकर
योजना आयोग गरीबी दूर करने की नीति बनाने के बदले गरीबी कम दिखाने के लिए फर्जी आंकड़े तैयार करने में समय लगा रहा है।--गुरुदास दासगुप्ता, भाकपा नेता
भले ही पिछले कुछ वर्षों में गरीबी कम हुई है, लेकिन गरीबी निर्धारित करने का योजना आयोग का पैमाना विसंगतियों से भरा हुआ है।--प्रफुल्ल पटेल
यूपीए के कार्यकाल में शुरू की गई कई कल्याणकारी और महत्वाकांक्षी योजनाओं के कारण गरीबों का जीवन स्तर सुधरा है। योजना आयोग के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं।--संदीप दीक्षित, कांग्रेस प्रवक्ता