एक समय था जब डाक विभाग की पहचान पोस्ट कार्ड हुआ करता था। वह पोस्ट कार्ड जो मोबाइल और सूचना क्रांति के दौर से पहले रोजाना न जाने कितने ही घरों की चौखट पर लोगों को इंतजार कराता था।
आज वही पोस्ट कार्ड फेसबुक, ट्विटर, वॉट्स एप, ई मेल के क्रांतिकारी दौर में अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। मगर सरकार पोस्ट कार्ड छापकर करोड़ों का घाटा सह रही है, फिर भी पाती लिखने की परंपरा की खातिर इसे बंद करने का फिलहाल उसका कोई इरादा नहीं है।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी मान लिया है कि पोस्टकार्ड की बिक्री में लगातार कमी आ रही है और यह बेहद घाटे का सौदा बनता जा रहा है।