कम पगार पाने वाले कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ) जमा किए बगैर आर्थिक सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
उन्हें पीएफ अंशदान से छूट मिल सकती है। निर्माण कार्य, बुनकर या फिर ऐसे किसी काम में जुटे कामगार जिनका मासिक वेतन कम होने के कारण वे पीएफ जमा कराने में सक्षम नहीं हैं, सरकार उनके लिए विशेष प्रावधान लाने का निर्णय ले चुकी है।
वहीं न्यूनतम दस कर्मचारी वाले संस्थानों या कंपनियों का ईपीएफओ के दायरे में आना अनिवार्य होगा। भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम (एम्प्लॉयज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन एक्ट) 1952 में संशोधन कर केंद्र इसे साकार करने की तैयारी में है।
प्रस्तावित संशोधन से पहली बार सरकार को यह शक्ति हासिल होगी कि वह कुछ श्रेणियों में गरीब कामगारों का अंशदान कम कर सकती है। यानी कर्मचारी को नियोक्ता के बराबर अंशदान करने की जरूरत नहीं होगी। उनकी सुविधा के अनुसार पीएफ अंशदान की राशि तय होगी।