फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिना इंश्यारेंस की गाड़ी में चलते हैं शिवराज

Tue, 23 Dec 2014 11:34 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
भोपाल की एक स्थानीय अदालत के उस फैसले से प्रदेश में कानून का खुला उल्लंघन चर्चा में आ गया है जिसमें अदालत ने पुलिस को कहा था कि पीड़ित व्यक्ति को पुलिस मुख्यालय का फर्नीचर बेचकर मुआवजा दिया जाए। अदालत का यह आदेश पुलिस की गाड़ी से घायल होने व्यक्ति याचिका पर आया था।
विज्ञापन


टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, कानून का खुले तौर पर उल्लंघन कर रहे बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के नाम सामने आए हैं। खबर है कि राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यपाल राम नरेश यादव और राज्य डीजीपी सुरेंद्र सिंह भी बिना बीमा की गाड़ियों में यात्रा करते हैं।

ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब जनता के प्रतिनिधि और कानून के रखवाले ही कानून का मजाक बनाएंगे तो आम नागरिक पर कानून का क्या असर होगा?

गौरतलब है मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति बिना बीमा वाली गाड़ी में यात्रा करता है तो उसे एक हजार रुपए तक जुर्माना या तीन साल की जेल या दोनों हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

राज्य के सीनियर अधिकारी ने खोली पोल

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक केसी मकवाना का इस बारे में कहना है कि एक सरकारी आदेश के अनुसार विभाग की गाड़ियों का बीमा नहीं कराया जा सकता। आदेश में कहा गया था कि किसी भी वाहन का बीमा कराया जाए तो सरकार के वित्तीय विभाग से अनुमति ली जाए।

एडीजीपी मकवाना ने कहा कि ऐसे में दुर्घटना करने वाली पुलिस की गाड़ी का बीमा न होने से पीड़ित व्यक्ति को विभाग के विशेष बजट से मुआवजा दिया जाता है।

अदालत ने पीड़ित को 13.5 लाख रुपए के मुआवजे का आदेश दिया था जिसे एक तय समय पर देने में पुलिस नाकाम रही थी। पुलिस की इस नाकामी पर कोर्ट आदेश मुआवजे के लिए पुलिस मुख्यालय की संपत्ति बेचकर मुआवजा भरने का आदेश दिया था।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य प्रशासन, राज्यपाल कार्यालय और पुलिस विभाग की 99 प्रतिशत गाड़ियां बिना बीमा के ही चलती हैं। कानून के मुताबिक इन सभी गाड़ियों का पब्लिक प्लेस पर चलना मना है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें