संघ प्रमुख मोहन भागवत के भारत को हिंदू राष्ट्र बताने के बयान को लेकर राजनीतिक जंग छिड़ गई है। कांग्रेस, सपा, माकपा समेत तमाम विपक्षी दलों ने भागवत को निशाने पर ले लिया है, जबकि भाजपा में भी उनके विरोध के सुर तेज हो गए हैं।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भागवत पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें हिटलर तक करार दे दिया है। भागवत ने रविवार को फिर कहा था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और हिंदुत्व इसकी पहचान है।
भागवत के बयान पर मोदी सरकार भी असहज महसूस कर रही है।
उनके बयान पर प्रतिक्रिया देने से भाजपा और सरकार की ओर से परहेज किया जा रहा है। हालांकि संघ से भाजपा में आए महासचिव राममाधव ने संघ प्रमुख का बचाव करते हुए मीडिया पर बयान को तोड़मरोड़ पेश करने का आरोप लगाया है।
गोवा से आई विरोध की आवाज
जबकि आरएसएस के विचारक एम जी वैद्य ने कहा कि मोहन भागवत ने कुछ गलत नहीं कहा है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें हिंदुत्व की समझ नहीं है।
गोवा में भाजपा विधायक माइकल लोबो ने भागवत के बयान को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी ऐसे बयान का समर्थन नहीं किया है।
भागवत के बयान को लेकर विपक्षी दल एकजुट हो गए हैं। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा है कि भागवत का बयान सांप्रदायिक आतंकवाद और ध्रुवीकरण की कोशिशों का संकेत देता है।
दिग्विजय ने बताया हिटलर
दिग्विजय सिंह ने कहा है कि उन्हें लगता था कि देश में एक व्यक्ति हिटलर बनने जा रहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि अब हमारे पास दो हिटलर हैं। उन्होंने कहा, भगवान भारत को बचाए। उन्होंने यह टिप्पणी ट्विटर पर की है।
दिग्विजय ने संघ पर धर्म का इस्तेमाल कर भोलेभाले लोगों को बेवकूफ बनाने का आरोप भी लगाया है। सपा महासचिव नरेश अग्रवाल ने कहा कि संघ नफरत और अलगाववाद की राजनीति कर रहा है। भागवत सामाजिक तानाबाना बिगाड़ने के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
माकपा नेता बृंदा करात ने कहा कि प्रधानमंत्री लाल किले से कहते हैं कि सांप्रदायिकता का माहौल नहीं रहने दिया जाएगा। लेकिन पहले उन्हें संघ प्रमुख पर लगाम लगानी चाहिए।
क्या बोले थे भागवत
भारत एक हिंदू राष्ट्र है और हिंदुत्व भारतवासियों की सांस्कृतिक पहचान है। हिंदुत्व का दायरा इतना बड़ा है कि वह अन्य धर्मों को भी अपने में समाहित करने की क्षमता रखता है।