इंदौर के हाइकोर्ट ट्रैफिक जंक्शन पर अगर आप को कभी कोई पुलिस वाला माइकल जैक्सन की तरह ट्रैफिक कंट्रोल करता दिख जाये तो आप हैरान हो जाएंगे। कितना भी ट्रैफिक हो, लेकिन रंजीत अपने ही अंदाज में उसे कंट्रोल करते हैं।
रंजीत कहते हैं कि वो अपना 100 प्रतिशत देते हैं। उनके लिए यह मायने नहीं रखता कि ट्रैफिक के नियम तोड़ने वाला कौन है? वो शहर के एसपी को भी नियम तोड़ने के लिए रोक चुके हैं। एक बार तो उन्होंने अपने पिता को भी रोक लिया था।
नया जोश है ठंडा हो जाएगा
रंजीत कहते हैं कि जब वो नये-नये भर्ती हुये थे, तब भी इसी जज्बे से काम करते थे। जिस पर लोग कहते थे कि नया-नया लड़का है कुछ दिन में जोश ठंडा पड़ जायेगा।
वो ठंडी, गर्मी, और बरसात की परवाह किये बिना, अपना काम करते रहते हैं। शुरुआत में जब रंजीत ने अपने अंदाज में ट्रैफिक को कंट्रोल करना शुरू किया तो लोग उन्हें सनकी समझते थे।
ये मेरी लाइफ का सबसे खराब समय था
रंजीत बताते हैं कि वो एक बार बरसात में अपनी ड्यूटी कर रहे थे, जिस दौरान उन्हें एक कार वाले ने टक्कर मार दी। जिस वजह से उन्हें 3 महीने तक बिस्तर पर ही रहना पड़ा और जब उन्होंने वापस ड्यूटी ज्वाइन की तो उन्हें डेस्क का काम दे दिया गया।
जिसकी वजह से वह बहुत ही नाखुश थे। 2010 में जब शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था की चर्चा हुइ तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने रंजीत का नाम लिया। जिसके बाद वह बहुत खुश थे, कि उन्हें फिर से अपना काम करने का मौका मिलेगा।