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कितने वायदे किए पूरे, पूछेगा पीएम ऑफिस

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने पहले दिन से ही कहना शुरू कर दिया है कि एनडीए सरकार की प्राथमिकता भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र को लागू करने की है।
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मगर अब कैबिनेट सचिवालय ने भी मंत्रालयों के सचिवों को लिखकर फरमान भेज दिया है कि अब उन्हें हर तीन महीने में लिखित तौर पर बताना होगा कि आखिर उन्होंने भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में उनके मंत्रालय से जुड़े क्षेत्र के बारे में किए गए वायदों को लेकर आखिर क्या काम किया।

पीएम को दी जाएगी सीधी र‌िपोर्ट

कैबिनेट सचिवालय की ओर से भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र को लागू करने के लिए मंत्रालयों को तेजी से काम करने के लिए कहा गया है। साथ ही इसकी रिपोर्ट सीधे पीएम नरेंद्र मोदी को करने के लिए कहा है। सभी मंत्रालयों को इस बारे में जानकारी देनी होगी।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री भी मंत्रियों के साथ बैठक कर हर महीने चुनाव घोषणा पत्र के संबंध में उनके मंत्रालयों के कामों की समीक्षा करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट सचिवालय के परफार्मेंस मैनेजमेंट सचिव प्रजापति त्रिवेदी ने सभी मंत्रालयों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि अब सभी मंत्रालयों की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को हर तीन महीने में भेजे जाने वाले रिजल्ट्स फ्रेमवर्क डॉक्यूमेंट यानी आरएफडी में बाकायदा एक कॉलम भाजपा चुनाव घोषणा पत्र के संबंध में किए गए कामों के बारे में शामिल होगा।

घोषणापत्र के वायदों को लागू करने पर जोर

इस कॉलम में मंत्रालयों को बताना होगा कि उन्होंने इस महीने आखिर अपने क्षेत्र के संबंध में भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वायदों और नीतियों को लेकर क्या काम किया।

चुनाव घोषणा पत्र के वायदों पर जल्द से जल्द अमल करने के लिए सरकार की ओर से ये फरमान आया है। प्रधानमंत्री इस बारे में सचिवों के साथ हुई पहली बैठक में कह चुके हैं।
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मंत्रियों और अफसरों की जवाबदेही बढ़ी

कैबिनेट सचिवालय की ओर से लिखित फरमान जारी किए जाने और फिर जवाब भी लिखित देने के चलते मंत्रियों और अफसरों की जवाबदेही ज्यादा बढ़ गई है। कोई भी हवा में दावा नहीं कर सकता कि उनका मंत्रालय तेजी से चुनाव घोषणा पत्र को लागू कर रहा है।

यही नहीं, अब मंत्रालय को किसी भी योजना और काम के प्रस्ताव के संबंध में कैबिनेट नोट पीएमओ और कैबिनेट सचिवालय को भेजना होगा। पीएमओ इस संबंध में तीन दिन में सवाल जवाब कर सकता है।

अगर तीन दिन में कोई सवाल जवाब नहीं आता है तभी मंत्रालय अपने प्रस्ताव को आगे बढ़ाकर इसे कैबिनेट के सामने पेश कर सकता है।
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