नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को राज्यपाल बनाने की कवायद आज शुरू कर दी और पहली किश्त में राम नाईक, केसरी नाथ त्रिपाठी, ओमप्रकाश कोहली और बलरामजी दास टंडन को राजभवन भेज दिया।
इनके अलावा पदमनाभा बालकृष्ण आचार्य को भी नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राम नाईक को उत्तर प्रदेश, केसरी नाथ त्रिपाठी को पश्चिम बंगाल, ओम प्रकाश कोहली को गुजरात और बलरामजी दास टंडन को छत्तीसगढ का राज्यपाल नियुक्त किया है।
सरकार बदलते ही राज्यपालों को हटाने की कवायद
मोदी सरकार के सत्तासीन होते ही पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा नियुक्त किए गए राज्यपालों को हटाने की कवायद शुरू हो गई थी, जिसका कांग्रेस ने विरोध किया था।
कांग्रेस ने राज्यपाल के पद को संवैधानिक बताया था और कहा था कि हर राज्यपाल को अपना कार्यकाल पूरा करने दिया जाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इस दलील को मानने से इंकार कर दिया था।
सत्ता में आने के बाद से ही केंद्रीय मंत्रियों सहित भाजपा के कई नेताओं के संप्रग के समय तैनात राज्यपालों को हर कीमत पर बदले जाने के स्पष्ट संकेत देने के बाद कुछ राज्यपालों ने तो अपने आप इस्तीफा दे दिया। कुछ ने केंद्र के आदेश पर अपना पद छोड दिया तो कुछ का तबादला कर दिया गया।
गुजरात की राज्यपाल बेनीवाल को मिजोरम भेजा
सबसे पहले उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद राजनीतिक दबाब बढ़ने के कारण नागालैंड के राज्यपाल अश्विनी कुमार, छत्तीसगढ के राज्यपाल शेखर दत्त, गोवा के राज्यपाल बीवी वांचू, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायण और त्रिपुरा के राज्यपाल वक्कम पुरूषोत्तम ने इस्तीफा दे दिया था।
नारायण ने पहले इस्तीफा देने से मना किया था लेकिन अगस्ता हेलीकॉप्टर सौदे में दलाली के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूछताछ करने के बाद उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया।
कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज का कार्यकाल समाप्त हो गया। पुद्दूचेरी के उपराज्यपाल वीरेंद्र कटारिया को पिछले हफ्ते हटा दिया गया था। गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल को मिजोरम भेज दिया गया, जिनके मोदी के साथ रिश्ते अच्छे नही रहे।
भाजपा ने 75+ नेताओं को राजभवन भेजा
नई नियुक्तियों को भाजपा द्वारा घोषित नीति के तहत 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं को राजभवन भेजने की शुरूआत माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बनाए गए राम नाईक और केशरीनाथ त्रिपाठी लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया था।
नाईक महाराष्ट्र में और त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाते रहे हैं। ओमप्रकाश कोहली दिल्ली और बलरामजी दास टंडन पंजाब की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पदमनाभा बालकृष्ण आचार्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में भाजपा का वर्षों से काम देखते रहे हैं।