योजना आयोग की जगह एक नई संस्था बनाने पर विचार करने के लिए दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक हुई है। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि योजना आयोग का स्वरूप बदलने पर आमतौर पर सहमति बनी है।
उन्होंने बताया कि बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पश्चिम बंगाल और मिज़ोरम के वित्त मंत्री और जम्मू-कश्मीर, झारखंड (जहां चुनाव चल रहे हैं) के अधिकारियों के अलावा अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में शामिल हुए।
जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि तीन टीमें मिलकर टीम इंडिया बनाती हैं। पहली टीम है प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री, दूसरी है प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल और तीसरी टीम है प्रधानमंत्री और उच्चाधिकारी। उन्होंने कहा कि इसी टीम इंडिया को योजना आयोग के बदले स्वरूप में भी परिलक्षित होना चाहिए। नई प्रस्तावित संस्था का मुख्य जोर मिलकर काम करने वाले संघीय ढांचे पर होगा।
जेटली के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना आयोग की परिकल्पना 1950 में तब हुई थी जब नियंत्रित अर्थव्यवस्था हुआ करती थी लेकिन अब हालात बदल गए हैं। इसलिए योजना आयोग की भूमिका, महत्व और पुनर्गठन में नयापन महसूस होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने 30 अप्रैल 2014 के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में योजना आयोग के बदले हुए रूप की बात की थी।
अरुण जेटली ने कहा कि आमतौर पर सभी ने यह राय जताई कि योजना आयोग के स्वरूप में बदलाव होना चाहिए और इसमें केंद्र, राज्य के साथ ही विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।
राज्यों को अपनी जरूरतों के हिसाब से चलाने दें योजना
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि योजना आयोग के स्वरूप में केन्द्र और राज्यों की समान भागीदारी होनी चाहिए। साथ ही राज्यों को अपनी जरूरतों के मुताबिक योजनाएं संचालित करने की पूरी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्रालयों को उपलब्ध होने वाली सहायता का राज्यों के बीच आवंटन पारदर्शितापूर्ण ढंग से पिछड़ेपन के आधार पर किया जाए। केंद्रीय प्लान बजट का कम से कम 50 प्रतिशत भाग राज्यों को एकमुश्त धनराशि के रूप में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके जरिए विकास के कार्यों को जल्द से जल्द कराया जा सके।
अखिलेश ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि सभी केंद्र पुरोनिधानित योजनाओं में कम से कम 90 प्रतिशत अनुदान राशि राज्यों को उपलब्ध कराई जाए। योजना आयोग के स्वरूप पर विचार करने से पहले राज्यों को यदि इसकी एक झलक उपलब्ध कराते हुए उस पर राज्यों की राय भी जानी जाए। इससे अधिक लाभ हो सकता है।
बैठक में नहीं आए तीन सीएम
योजना आयोग के स्थान पर नई संस्था के पुनर्गठन को लेकर आयोजित मुख्यमंत्रियों की बैठक में तीन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रविवार को हुई जिसमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।
बैठक में शामिल न होने वाले मुख्यमंत्रियों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम सामने आ रहे हैं।
गौरतलब है कि योजना आयोग को रद्द करने के बाद इसके स्थान पर किसी नई संस्था को गठन को लेकर सभी राज्यों के मुख्मंत्रियों की बैठक बुलाई गई थी।
बैठक में शामिल न होने वाले मुख्यमंत्रियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने ममता सरकार पर टिप्पणी की है। फडनवीस ने कहा है कि जो भी मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए उन राज्यों को काफी महंगा पड़ेगा।
हालांकि अभी तक तीनों मुख्यमंत्रियों की ओर से बैठक में शामिल न का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया और न ही किसी प्रकार की प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।
दो चरण में हुई बैठक
जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में होने वाली यह बैठक दो चरणों में आयोजित की गई। पहले चरण में ज्यादातर राज्यों से पहुंचे मुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री ने संबोधित किया। इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बैठक को संबोधित किया।
दूसरे चरण की बैठक में योजना आयोग के स्थान पर नई संस्था को गठन को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्रियों की राय जानना था और उनके सुझाव लेना था।
ऐसा भी माना जाता है कि दूसरे चरण की बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से विशेष पैकेज की मांग भी कर सकते हैं।