लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी भी बिजनौर से फरार आतंकियों के निशाने पर थे। कई बार मोदी को इन दहशतगर्दों ने निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पटना में मोदी की रैली में विस्फोट कराने में इन आतंकियों का ही हाथ था।
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एसटीएफ का मानना है कि पटना रैली, बोधगया में हुए विस्फोट और बिजनौर में आतंकियों के कमरे से मिला बम एक जैसा है। इन सब बमों को मोहल्ला जाटान में हुए विस्फोट के दौरान झुलसे आतंकी महबूब ने ही बनाया था।
देश में आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन सरगना यासीन भटकल के पकड़े जाने के बाद बिखर गया। उधर, पाबंदी लगने के बाद सिमी का संगठन गुपचुप सक्रिय रहा। इंडियन मुजाहिद्दीन से जुडे़ आतंकी भी सिमी से आ मिले। सिमी की कमान संभालने वाला अबू फैजल भी खंडवा जेल से फरार होने के बाद पकड़ा गया। अब संगठन की कमान बिजनौर में छिपे आतंकी एजाजुद्दीन को मिल गई मानी जा रही है।
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आतंकियों के खतरनाक मंसूबे
खुफिया सूत्रों के मुताबिक सिमी संगठन ने लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की ठान ली थी। इन आतंकियों ने बिहार के पटना में मोदी की रैली में सात विस्फोट किए तो लखनऊ में मोदी की रैली की रैकी की। वेस्ट यूपी की रैलियों की भी रैकी कराई गई थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण आतंकी अपने मकसद में कामयाब नहीं हुए। 27 अक्तूबर 20013 को बिहार के पटना में हुए सात विस्फोट और सात जुलाई 2013 को बिहार के बोधगया में हुए विस्फोट में भी बिजनौर में छिपे आतंकियों का हाथ था। इन विस्फोटों में आतंकियों के कई साथी पकडे़ गए थे।
मिलान कराने पर बम एक समान निकले बिजनौर में विस्फोट होने के बाद पटना और बोधगया में फटे बमों के मिलान कराए गए तो ये एक जैसे पाए गए। छोटे गैस सिलेंडर में बने बम में टाइमर लगा कर ये विस्फोट किए गए थे। जैसा टाइमर और एलबो लोहे का पाइप बिजनौर में आतंकियों के कमरे से मिला है, वैसा ही पटना और बोधगया में हुए विस्फोट वाले बम में प्रयोग किया गया था।
महबूब बम बनाने का एक्सपर्ट सूत्रों का दावा है कि बिजनौर में विस्फोट के बाद झुलसा आतंकी महबूब इन बमों को तैयार करता था। पटना और बोधगया के बम भी महबूब ने ही तैयार किए थे। महबूब आतंकियों के संगठन का महत्वपूर्ण सदस्य है। वह बम बनाने का एक्सपर्ट है। इसकी उसने ट्रेनिंग ले रखी है। इसलिए आतंकी महबूब को नहीं खोना चाहते। झुलसने के बाद भी उसे अपने सीने से लगाकर छिपे घूम रहे हैं। वह चलने फिरने के काबिल भी नहीं है। आतंकियों के लिए झुलसा साथी महबूब बहुत खास है।
मुजफ्फरनगर में दो जगह थी विस्फोट की तैयारी
आतंकियों का इरादा मुजफ्फरनगर को दहलाने का था। मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेने के लिए ये आतंकी बिजनौर में छिपे थे। मुजफ्फरनगर में आने वाले त्योहारों पर दो जगह विस्फोट करने की योजना बनाई जा चुकी थी। बिजनौर में विस्फोट होने के बाद झुलसे साथी को लेकर मोहल्ला भाटान के कमरे पर पहुंचे आतंकियों ने इसका खुलासा मकान मालिक रईस के पुत्र अब्दुल्ला के सामने किया था। अब्दुल्ला ने यह बात पुलिस और खुफिया एजेंसियों को बताई है। उधर, हुसना के भाई और कई अन्य मददगारों के खिलाफ रिपोर्ट की तैयारी शुरू कर दी गई है।
12 सितंबर को मोहल्ला जाटान में विस्फोट होने के बाद आतंकी भाग गए थे। एटीएस से लेकर एसटीएफ आतंकियों की तलाश में जुटी है, लेकिन कोई आतंकी हाथ नहीं आया है। पुलिस ने इस मामले में भाटान निवासी रईस, उसके पुत्र अब्दुल्ला, गांव उमरी निवासी हुसैना उर्फ हुसना को गिरफ्तार किया है। रईस के मकान में हुसना और उसकी बहन रूबी से अलग आतंकी किराए के कमरे में रहते थे। विस्फोट होने के बाद आतंकी झुलसे साथी महबूब को लेकर भाटान वाले कमरे पर गए थे।
सूत्रों के अनुसार अब्दुल्ला ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों को बताया कि वह जब आतंकियों वाले कमरे पर पहुंचा तो आतंकी अमजद उर्फ उमर कह रहा था कि विस्फोट होने से सारा प्लान चौपट हो गया। मुजफ्फरनगर में दो जगह बम विस्फोट करना था। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान उनके मजहब की महिलाओं से हुए बलात्कार और उनके भाइयों के कत्ल का बदला लेने के लिए यह विस्फोट किए जाने थे। आने वाले त्योहार नवरात्र और दशहरे पर आतंकियों का विस्फोट करने का इरादा था।
एसपी सिटी कल्पना सक्सेना भी इस बात को मानती हैं कि उन्हें इस बात का पता चल गया है कि आतंकियों को विस्फोट कहां करना था? जिसका समय आने पर खुलासा करेंगी। अभी इस बात का खुलासा करना उचित नहीं है।
आतंकियों की मदद करने में पकड़े गए हुस्ना के भाई नदीम के अलावा किसी मददगार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। आतंकियों की तलाश में पुलिस, एसटीएफ और एटीएस ने चप्पा-चप्पा छान मारा है, लेकिन आतंकियों का कोई पता नहीं चला है। नगीना क्षेत्र का जंगल भी पुलिस ने खंगाल डाला है। शनिवार को नदीम को लेकर पुलिस ने उमरी गांव भी खंगाला था। वहां से कुछ सामान भी पुलिस को मिला था। एसपी सतेंद्र कुमार के मुताबिक ऐसा लगता है कि आतंकी जिले से निकल गए हैं। उनकी कोई लोकेशन अब जिले में नहीं मिल रही है।
मतदान के बाद शहर से निकले थे आतंकी विस्फोट होने के बाद पूरी रात मोहल्ला भाटान में कमरे पर रहने के बाद आतंकी अगले दिन मतदान होने के बाद शाम के समय बाइक से उमरी गए थे। आतंकियों ने बिजनौर से निकलने का ऐसा समय चुना था, जब पुलिस ईवीएम मशीन को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में लगी थी। आतंकी हुसैना उर्फ हुस्ना और उसकी बहन रूबी को बहन मानते थे। धर्म की बातों का सहारा लेकर आतंकियों ने दोनों बहनों के साथ अब्दुल्ला को भी अपने साथ जोड़ लिया था। ये सारी बात हुसैना ने पुलिस को बताई हैं।
12 सितंबर को विस्फोट होने के बाद आतंकी जब मोहल्ला भाटान वाले कमरे पर झुलसे हुए साथी को लेकर पहुंचे, तो उसका चेहरा बुरी तरह जला हुआ था और पैरों के पास पानी टपक रहा था। हुस्ना आलिम है, आतंकी उससे अपने मजहब की बात करते रहते थे। मजहब की जिन पुस्तकों का अर्थ समझ में नहीं आता था, उसके बारे में हुस्ना से मालूम करते थे।