प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के सियासी समीकरण और आगामी चुनावों का ख्याल रखते हुए अपने पहले मंत्रिमंडल विस्तार को मूर्त रूप देने जा रहे हैं। राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के साथ ही बिहार, झारखंड और राजस्थान के चेहरे मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेंगे। उत्तर प्रदेश से वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी और गोवा से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले मनोहर परिकर को कैबिनेट में शामिल किया जाना तय है।
इसके अलावा कुछ राज्यमंत्रियों की तरक्की और कुछ मंत्रियों के प्रभार में फेरबदल किए जाने की संभावना है। राष्ट्रपति भवन में रविवार को करीब डेढ़ दर्जन नए मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने के पुख्ता संकेत हैं।
प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले सभी चेहरों को रविवार सुबह अपने निवास पर चाय-नाश्ते के लिए आमंत्रित किया है। लेकिन हर बार कुछ नया करने वाले मोदी ने विस्तार के तहत सरकार में शामिल होने वाले चेहरों पर अब भी कुछ संशय बरकरार रखा है।
डेढ़ दर्जन से ज्यादा संभावित मंत्री
भाजपा महासचिव राजीव प्रताप रूढ़ी ने कहा कि 10 नए मंत्री बनाए जाएंगे। जबकि सूत्र बताते हैं प्रधानमंत्री के यहां रविवार सुबह चाय पर पहुंचने के लिए डेढ़ दर्जन से ज्यादा संभावित मंत्रियों को पीएमओ से फोन पर सूचना दी गई है।
उनमें परिकर और नकवी के अलावा बंगाल से संसद बाबुल सुप्रियो, पंजाब से विजय सांपला, राजस्थान से सांवर लाल जाट, झारखंड से जयंत सिन्हा, महाराष्ट्र से हंसराज अहीर, उत्तराखंड से अजय टमटा, आंध्र प्रदेश से बंडारू दत्तात्रेय, बिहार से गिरिराज सिंह व रामकृपाल यादव और हरियाणा से चौधरी वीरेंद्र सिंह के नाम हैं। गौरतलब है कि मोदी कैबिनेट में हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल सहित पूर्वोत्तर के कई राज्य प्रतिनिधित्व से वंचित रह गए थे जबकि बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, और छत्तीसगढ़ सरीखे राज्यों का प्रतिनिधित्व कद के हिसाब से नहीं मिल पाया था। मोदी सरकार में कुछ ऐसे ही मंत्री हैं जिनके काम की रिपोर्ट ठीक नहीं है। ऐसे मंत्रियों का विभाग बदलकर कम महत्व के विभागों में भेजा जाएगा।
इसलिए जरूरी है विस्तार
सरकार गठन के पांच महीने बाद हो रहे मंत्रिमंडल विस्तार में पीएम का जोर विशेष रूप से मंत्रियों का बोझ हल्का करने, वंचित और चुनावी राज्यों को प्रतिनिधित्व देने के साथ बुनियादी विकास के मंत्रालयों को कुशल नेतृत्व प्रदान करने पर है। मोदी ऐसे मंत्रियों को भी इधर से उधर करेंगे जो कि बाबू तंत्र से काम नहीं निकाल पा रहे हैं।
मंत्रिमंडल में साफ-सुथरे चेहरों के अलावा गवर्नेंस की इमेज वाले नेताओं पर दांव आजमाया जा रहा है ताकि वे प्रधानमंत्री मोदी की आक्रमकता के साथ सरकार के कामकाज में सामंजस्य बना सकें। वैसे बीते पांच महीनों में पीएम को भी अपनी सरकार की कमियों का भान हो चला है। मंत्रिमंडल विस्तार उन कमियों को पाटने का एक अवसर भी माना जा रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दलों का भी ख्याल रखा जा रहा है। टीडीपी से वाईएस चौधरी और शिवसेना के अनिल देसाई मंत्री पद की शपथ लेंगे।
सुरेश प्रभु पर फंसा पेच
सुरेश प्रभु को शिवसेना ने अपने कोटे में मंत्री पद दिए जाने से मना कर दिया है। इसलिए अब इस बात पर मंथन चल रहा कि भाजपा अपने कोटे से प्रभु को मंत्री बनाए। शनिवार देर शाम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सात रेसकोर्स जाकर प्रधानमंत्री से कैबिनेट विस्तार और शिवसेना के साथ चल रही खींचतान के मुद्दे पर चर्चा की।
इनका बोझ होगा हल्का
अरुण जेटली, नितिन गडकरी, नरेंद्र सिंह तोमर, रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावडेकर और पीयूष गोयल
इनका मंत्री बनना तय
मनोहर परिकर, मुख्तार अब्बास नकवी, जेपी नड्डा, वाईएस चौधरी, बाबुल सुप्रियो, विजय सांपला, सांवर लाल जाट, जयंत सिन्हा, बंडारू, गिरिराज सिंह, रामकृपाल यादव, चौधरी वीरेंद्र सिंह, अनिल देसाई
इनके बनने की संभावना
सुरेश प्रभु, राजीव प्रताफ रूढ़ी, महेश शर्मा, निरंजना ज्योति, राज्यवर्धन सिंह राठौर और अजय टमटा