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'दोस्त' एबॉट को अलविदा कह फिजी पहुंचे पीएम मोदी

Wed, 19 Nov 2014 03:17 PM IST
एजेंसी, नवाज अहमद/मेलबर्न, कैनबरा, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अगला पड़ाव है दक्षिण प्रशांत सागर में मौजूद एक छोटा सी द्वीपीय देश फिजी। मोदी फीजी पहुंच चुके हैं। इससे पहले मोदी आस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान जैसे बड़े और ताकतवर देशों का दौरा कर चुके हैं। सवाल उठता है कि आखिर कौन सी ऐसी चीज है जो मोदी को फिजी की तरफ आकर्षिंत कर रही है।
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मोदी ने अपनी सरकार के शुरूआती छह महीनों में जिन भी देशों का दौरा किया उनका वहां उनका एजेंडा भारत में निवेश को बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग को बढ़ाने पर था। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद मोदी ऐसे दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री है जो फिजी के दौरे पर जा रहे है। इस दौरे पर मोदी का एजेंडा क्या होगा इस पर पेश है एक आकलन।

फिजी से है पुराना रिश्ता
भारत और फिजी के रिश्तों की नींव 1879 में उस वक्त पड़ी जब हजारों की तादाद में भारतीय मजदूरों को यहां लाया गया। 1879 से 1916 के बीच करीब 60000 भारतीय गन्ने की खेती के लिए फिजी लाए गए। बाद में भारतीय व्यापारी भी फिजी पहुंचा शुरू हुए। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार पुष्पेश पंत के मुताबिक एक वक्त ऐसा भी आया था जब फिजी में भारतीयों की संख्या वहां की आबादी में आधी से ज्यादा होने की कगार पर पहुंच गई थी।
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उन्होंने बताया कि फिजी में जब भारतीय मूल के प्रधानमंत्री महेंद्र चौधरी का तख्ता पलट हुआ तो उसके बाद भारतीयों का सताया जाने लगा। हालांकि अब हालात काफी बेहतर हैं। 17 सितंबर को फिजी में हुए चुनाव के बाद प्रधानमंत्री जेवी बैनीमारामा की लोकतांत्रिक सरकार सत्ता में आई है और मोदी लोकतंत्र को अपनी यात्रा के जरिए मजबूती प्रदान करने की कोशिश करेंगे।

फिजी में रहने वाले भारतीय समुदाय पर नजर

चुनाव में अहम भूमिका
करीब आठ साल बाद फिजी में हाल में हुए चुनाव में भी भारत की भूमिका अहम रही। भारत इस चुनाव की निगरानी करने वाले प्रमुख देशों में शामिल था। वर्ष 2006 में यहां तख्तापलट हो गया था।

सामरिक महत्व
चीन लगातार दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ा रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज के जबिन टी जेकब के मुताबिक फिजी एक छोटा लेकिन रणनीतिक और भौगोलिक रूप से बेहद अहम देश है। इसके चलते भारत फिजी के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहेगा। चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर अगर भारत फिजी के साथ संबंध मजबूत करता है तो दक्षिण प्रशांत में भारत की स्थिति अपने आप मजबूत हो जाएगी।

सांस्कृतिक संबंध
अमेरिका हो या ऑस्ट्रेलिया मोदी जहां भी गए वहां भारतीय मूल के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। जहां तक फिजी की बात है तो यहां की जनसंख्या का 37 प्रतिशत हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार पुष्पेश पंत का कहना है कि मोदी का मकसद उन देशों में अपनी ताकत और रुतबे दिखाने की है जहां भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं। मोदी इसके जरिए दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में भारत की मौजूदगी को भी सुनिश्चित करना चाहेंगे।

कारोबार
भारत और फिजी के बीच हाल के दिनों में कारोबार में भारी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2005 में दोनों देशों का कुल कारोबार महज दो करोड़ 85 लाख डॉलर था। लेकिन वर्ष 2013 में भारत ने फिजी को 11.28 करोड़ डॉलर का निर्यात किया, जबकि आयात महज 11.2 लाख डॉलर का ही रहा। इस हिसाब से व्यापार संतुलन भी भारत के पक्ष में दिखा। दोनों देशों के बीच यह कारोबार आईटी, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में हुआ।

मोदी ने ‘दोस्त’ एबॉट के साथ ली सेल्फी

सेल्फी के लिए मशहूर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आस्ट्रेलियाई पीएम व अपने ‘दोस्त’ टोनी एबॉट के साथ भी सेल्फी क्लिक की। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ली गई इस विशेष सेल्फी पर दोनों नेताओं ने अपने हस्ताक्षर भी किए हैं। ट्विटर पर अपलोड इस तस्वीर पर मोदी ने कैपशन दी, ‘शुक्रिया ऑस्ट्रेलिया! पिछले कुछ बेहद शानदार रहे। इस यादगार यात्रा की कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं। एमसीजी पर अपने दोस्त टोनी एबॉट के साथ।’

सुरक्षा खतरों से मिलकर लड़ेंगे भारत और ऑस्ट्रेलिया
आतंकवाद, समुद्री, साइबर जैसे तमाम खतरों से निपटने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया में आपसी सहयोग पर सहमति बन गई है। अब दोनों देश विदेशी आतंकियों समेत हर तरह के खतरे से मिलकर लड़ेंगे। इसके अलावा भारत के परमाणु संयंत्रों को ऑस्ट्रेलिया जल्द ही यूरेनियम की आपूर्ति कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह पर आस्ट्रेलियाई पीएम टोनी एबॉट ने घोषणा की कि वह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करने का इच्छुक है। अगले साल के अंत तक दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं।

एबॉट ने मोदी को अपना बड़ा भाई करार देते हुए कहा, ‘अगर सब कुछ सही रहा, तो ऑस्ट्रेलिया उपयुक्त सुरक्षा उपायों के मद्देनजर यूरेनियम की आपूर्ति करेगा क्योंकि स्वच्छ ऊर्जा एक ऐसा अहम योगदान है, जिसे दुनिया में फैलाने के लिए ऑस्ट्रेलिया अपना योगदान दे सकता है। इसके अलावा अगले साल के अंत तक भारत के साथ हम मुक्त व्यापार समझौते पर भी हस्ताक्षर कर लेंगे।’ एबॉट और मोदी के बीच केमिस्ट्री का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह बार-बार प्रधानमंत्री को नरेंद्र कहकर संबोधित कर रहे थे। दुनिया भर में उपलब्ध यूरेनियम का करीब 40 फीसदी हिस्सा अकेले ऑस्ट्रेलिया के पास है और वह हर साल करीब 7000 टन यूरेनियम का निर्यात करता है।

प्रधानमंत्री मोदी की पहली ऑस्ट्रेलियाई यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सामाजिक सुरक्षा, सजायाफ्ता कैदियों के ट्रांसफर, नशे के व्यापार, पर्यटन और कला व संस्कृति के मुद्दे पर पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए व्यापक वैश्विक रणनीति पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसे बढ़ावा देने वालों को अलग-थलग करना होगा। आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। भारत इस समस्या से तीन दशक से जूझ रहा है। धर्म और आतंकवाद को जोड़ने के प्रयास को विफल करना होगा। मोदी मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित कर रहे थे, ऐसा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।
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मेक इन इंडिया के लिए दिया न्योता

नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर यह भी घोषणा की कि 2015 में भारत ऑस्ट्रेलिया में ‘मेक इन इंडिया’ का आयोजन करेगा जबकि अगले साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया भारत में एक बिजनेस वीक का आयोजन करेगा।

बहुत ही कम है भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सालाना करीब 15 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है जबकि चीन के साथ ऑस्ट्रेलिया का द्विपक्षीय व्यापार 150 बिलियन डॉलर से भी अधिक है।

...जब ठहाकों से गूंज उठी आस्ट्रेलियाई संसद
आस्ट्रेलियाई संसद में संबोधन के दौरान मोदी ने अपने मजाकिया लहजे से संसद को ठहाका लगाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में वह तीसरे विदेशी हैं जो आस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित कर रहे हैं। आप लोग पता नहीं कैसे इसे बर्दाश्त कर रहे हैं। हो सकता है यह आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एबॉट के कामकाज करने के तरीके का असर हो। मोदी की इस टिप्पणी से संसद भवन ठहाकों से गूंज उठा।

मोदी ने एबॉट को भेंट की रानी लक्ष्मी बाई की याचिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबॉट को ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ रानी लक्ष्मीबाई की ओर से आस्ट्रेलियाई वकील जॉन लैंग की लिखी याचिका भेंट की। भारतीय इतिहास में लैंग के योगदान की याद दिलाते हुऐ प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय वार्ता से ठीक पहले 1854 में लिखी इस अर्जी की मूल प्रति एबॉट को उपहार के रूप में दिया। इसके अलावा मोदी ने आस्ट्रेलियाई युद्ध स्मारक पर एबॉट को सिख बटालियन की धरोहर मान सिंह ट्रॉफी भी भेंट की।

एबॉट ने मोदी को बताया भाई जैसा
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबॉट भी पीएम मोदी को मुरीद हो गए। उन्होंने मोदी को भाई जैसा करार दिया। द्विपक्षीय शिखर वार्ता के बाद प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एबॉट कई बार ‘नरेंद्र और मैं’ शब्द का इस्तेमाल करते दिखे। इससे पता चलता है कि एबॉट के लिए मोदी के मन में कितना निजी सम्मान है। संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में आने के दौरान एबॉट मोदी का हाथ थामे दिखाई पड़े।
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