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लोकसभा में बोले मोदी, 'गांव से हैं माफ कर दो'

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केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का 'रामजादा-हरामजादा' बयान भाजपा के लिए जी का जंजाल बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन सदन में उनके बयान पर सफाई पेश की।
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पीएम ने कहा कि सदन की कार्यवाही रुकने से देश का नुकसान हो रहा है। संसद को अब साध्वी के बयान के लिए माफ कर देना चाहिए। साध्वी ने अपने बयान पर संसद के दोनों सदनों से माफी मांग ली है।

पीएम ने साध्वी को माफ करने के पीछे तर्क दिया कि संसद को साध्वी की पृष्ठभूमि का खयाल रखना चाहिए। वह गांव से हैं। उन्होंने विपक्ष से मामले पर अड़ियल रवैया त्यागने का आग्रह करते हुए विपक्ष के वरिष्ठ लोगों से सदन को चलाने में सहयोग करने की अपील की।
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इसके ठीक बाद कई विपक्षी दलों ने संसद वॉकआउट कर दिया। वहीं, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जून खड़ने कहा कि पीएम इस बात का विश्वास दिलाएं कि भविष्य में कोई मंत्री इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करेगा। वरना उनका विरोध जारी रहेगा।
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राज्यसभा में पीएम ने नई होने के लिए माफ करने को कहा था

दो दिनों के लगातार विरोध के बाद बृहस्पतिवार को पहली बार प्रधानमंत्री ने साध्वी मसले पर चुप्पी तोड़ते हुए सदन से उन्हें माफ करने की अपील की थी। तब उन्होंने साध्वी को राजनीति में नई होने का तर्क दिया था। गौरतलब है कि नई सरकार के गठन के बाद यह पहला अवसर है जब किसी एक मुद्दे पर विपक्ष के 9 दलों ने न केवल एकजुट हो कर सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

इस सरकार में यह पहली बार है जब किसी मसले पर विपक्ष काली पट्टी बांध कर सदन में पहुंचा। साध्वी के आपत्तिजनक बोल पर फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच छिड़ी जंग थमने केआसार नहीं है। साध्वी के बिगड़े बोल ने न केवल कई विपक्षी दलों को एकजुट कर दिया है, बल्कि इस मामले में स्पीकर को भी विपक्ष के एक बड़े धड़ा का हमला झेलना पड़ा है।

बृहस्पतिवार की तरह ही शुक्रवार को भी टीएमसी, सपा, वाम दल, आप, आरजेडी, जेडीयू के सदस्य सदन से बाहर चले गए। बाद में इन दलों ने संसद भवन परिसर पर स्पीकर पर सीधे सीधे पक्षपात करने और सरकार पर तानाशाही करने का आरोप लगाया।
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