नई सियासी परिस्थितियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगाहें अब अन्नाद्रमुक की मुखिया जयललिता और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को साधने पर टिकी हैं।
तमाम कोशिशों के बावजूद राज्यसभा में विपक्ष को साधने में नाकाम रहने और निकाय चुनाव में पश्चिम बंगाल में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने नया सियासी समीकरण खड़ा करने में दिलचस्पी दिखाना शुरू कर दिया है।
माना जा रहा है कि चीन दौरे से वापस लौटने के बाद पीएम अन्नाद्रमुक को केंद्रीय मंत्रिमंडल में भागीदारी देने की संभावना तलाशेंगे। इसकी शुरुआत पीएम मोदी ने आय से अधिक संपत्ति मामले में बंगलुरू हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद जयललिता से बातचीत कर शुरू कर दी है। नई परिस्थितियों में भाजपा की ओर से ममता पर ताबड़तोड़ हमलों के बीच पीएम मोदी ने टीएमसी को भी साधने की पहल की है।
ममता को बीती बातें भूल जाने की सलाह
पश्चिम बंगाल दौरे में पीएम की ममता को बीती बातें भूल जाने की सलाह और इसके बाद ममता का पीएम मोदी के साथ जून में बांग्लादेश दौरे में जाने की औपचारिक सहमति देने को नए सियासी समीकरण बनने के रूप में देखा जा रहा है।
माना जा रहा है कि मोदी की इस पहल के बाद भाजपा का ममता और टीएमसी के खिलाफ आक्रामक रुख में नरमी देखने को मिल सकती है।
उल्लेखनीय है कि टीएमसी-भाजपा की तनातनी तब बहुत ज्यादा बढ़ गई थी जब शारदा चिट फंड घोटाला मामले में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने सीधे ममता पर निशाना साधा था।
जयललिता को साधने में जुट गए
दरअसल पीएम मोदी सत्ता संभालते ही जयललिता को साधने में जुट गए थे। कई दौर की बातचीत के बाद जयललिता केंद्र सरकार में भागीदारी के लिए तो तैयार नहीं हुई, मगर उन्होंने पार्टी नेता एम थंबीदुरई को लोकसभा उपाध्यक्ष बनाने पर सहमति दे दी।
अन्नाद्रमुक के सूत्र स्वीकार करते हैं कि बदली परिस्थितियों में भाजपा और अन्नाद्रमुक मजबूत रिश्ते की राह में एक कदम और आगे बढ़ सकते हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक अन्नाद्रमुक केसरकार में शामिल होने के बारे में नए सिरे से विचार का सिलसिला शुरू हो सकता है। पार्टी में फिलहाल समय पूर्व चुनाव पर विचार विमर्श जारी है। ऐसे में यह तय किया जाना है कि समय पूर्व चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार में शामिल होने का फैसला सही रहेगा या नहीं।