नरेंद्र मोदी के सवाल पर फिलहाल भाजपा और जद-यू में तकरार के आसार नहीं हैं। मोदी को रविवार को चुनाव प्रचार अभियान समिति की कमान सौंपने के फैसले को जद-यू ने भाजपा का आंतरिक मामला करार दिया है।
पार्टी ने कहा है कि मोदी भाजपा की समिति के अध्यक्ष बने हैं, राजग के नहीं। इसलिए इस मामले में विरोध का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि प्रधानमंत्री पद के सवाल पर दोनों दलों के आमने-सामने आने के आसार खत्म नहीं हुए हैं।
जद-यू ने जहां स्पष्ट कर दिया है कि वह पीएम पद पर मोदी की उम्मीदवारी के विरोध पर अब भी कायम है, वहीं भाजपा ने भी साफ संकेत दिया है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद पार्टी मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बना सकती है।
मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जद-यू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि कोई भी पार्टी अपने हित में संगठनात्मक पुनर्गठन के लिए स्वतंत्र है।
गौरतलब है कि मोदी को कमान देने से पहले भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह इस बारे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति ले चुके हैं। जद-यू सूत्रों का कहना है कि नीतीश ने साफ कर दिया है कि पार्टी का विरोध केवल मोदी की पीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर है।
बहरहाल, मोदी के मामले में भविष्य में दोनों दलों के बीच टकराव के आसार अभी से बन रहे हैं। भाजपा नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित पार्टी के कई अन्य नेताओं के विरोध को दरकिनार कर मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बना दिया। पार्टी नेतृत्व की योजना आम चुनाव की घोषणा होते ही मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की है।
उधर, इस मुद्दे पर मोदी का तीखा विरोध करती आ रही सहयोगी पार्टी जद यू के तेवर अब भी नरम नहीं पड़े हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने निजी बातचीत में दो टूक शब्दों में कहा कि जद-यू मोदी को बतौर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।