गोवा में भाजपा की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को आम चुनाव की कमान सौंपने के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के लिए हमदर्दी जतायी है।
वहीं केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ल ने कहा कि भाजपा अपने दस नेताओं को तो एकजुट नहीं रख सकती है, गठबंधन सरकार में वह अपने मंत्रियों में एकता कैसे रख पाएगी।
कांग्रेस के ही शकील अहमद ने कहा कि आडवाणी को अपने किए की सजा मिली है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि आडवाणी भाजपा की सीटों की संख्या को दो से बढ़ाकर 182 तक लाए और आज भाजपा ने उनको ही दरकिनार कर दिया। भाजपा अपने नेता का एहसान नहीं मानने वाली एक ऐसी पार्टी है जिसके नेतृत्व में आपसी मतभेद हैं।
उल्लेखनीय है कि आडवाणी ने अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राजनीतिक कैरियर में पहली बार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भाग नहीं लिया।
आडवाणी की अनुपस्थिति मीडिया में चर्चा का विषय बनी रही। कयास लगते रहे कि आडवाणी मोदी को तरजीह देने पर नाराज हैं।
चुनाव की कमान मिलने के बाद मोदी को आगामी चुनाव में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के मसले पर सिंह ने कहा कि यह तो भाजपा को तय करना है। वैसे मैं मोदी को दिल से बधाई देता हूं।
भाजपा में चल रही ऐसी कथित कलह पर शुक्ल ने कहा कि भाजपा में एकजुटता एक बड़ा सवाल है।
अहमद ने कहा कि आडवाणी ने जो बोया वही काटा। आडवाणी ने ही देश में 1985-86 के बाद सांप्रदायिक राजनीतिक फैलाई। लेकिन अब मोदी आडवाणी से बड़े सांप्रदायिक नेता हो गए हैं। यही वजह है कि आज भाजपा ने आडवाणी को दरकिनार कर दिया।