लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार का सिलसिला अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस के खिलाफ मतदाताओं में अभी भी गुस्सा है। झारखंड और जम्मू-कश्मीर में जो चुनाव परिणाम सामने आए हैं, उससे तो यही नजर आ रहा है। इससे पहले महाराष्ट्र, हरियाणा में भी कांग्रेस को मतदाताओं ने बुरी तरह खारिज कर दिया था।
लगता है यूपीए सरकार की नाकामियां लोगों के जेहन में अभी भी हैं और वो कांग्रेस के खिलाफ लगातार अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। मोदी सरकार को भले ही सत्ता में छह महीने से ज्यादा हो गए हैं और वो अपने कई वादों पर खरी न उतरी हो, फिर भी बीजेपी नेतृत्व से लोग आस लगाए बैठे हैं।
बात जम्मू-कश्मीर की करें तो 87 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस महज 12 तक सिमटती नजर आ रही है। 2009 के मुकाबले उसे यहां करीब 5 सीटों का नुकसान नजर आ रहा है। चूंकि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस सत्ता में सहयोगी दल के तौर पर ही थी, इसलिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुकाबले कांग्रेस को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस को 2009 के मुकाबले यहां 15 सीटों का नुकसान नजर आ रहा है। वो केवल 13 सीटों तक सिमटती नजर आ रही है।