आखिरकार रेलवे घूसकांड के भंवर में फंसे रेल मंत्री पवन बंसल की विदाई हो गई।
घूसकांड में रेल मंत्री के भतीजे विजय सिंगला का नाम आने के साथ ही उनकी कुर्सी पर तलवार लटकने लगी थी।
फिर जब मामले में सीबीआई को बंसल के शामिल होने के अहम सबूत मिले तो उनका जाना तय हो गया।
और शुक्रवार को बंसल को रेल मंत्री के पद से हटा ही दिया गया।
घूसकांड के सामने आने और रेलमंत्री से इस्तीफा लेने के बीच इन 7 दिनों में क्या-क्या घटनाक्रम बदले, पेश है ये रिपोर्ट-
3 मई: सामने आया घूस कांड
सीबीआई ने चंडीगढ़ में रेल मंत्री पवन कुमार बंसल के भांजे विजय सिंगला के यहां छापा मारकर रेलवे में प्रमोशन के लिए 90 लाख रुपये की घूसखोरी के सनसनीखेज मामले का खुलासा किया।
सिंगला के साथ ही रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश महेश कुमार और दो बिचौलिए मंजूनाथ और संदीप गोयल भी गिरफ्तार किए गए।
सिंगला ने महेश कुमार की ओर से भेजे गए मंजूनाथ नाम के शख्स से यह रकम हासिल की थी।
बकरे का ‘टोटका’ भी नहीं बचा पाया बंसल की कुर्सी
4 मई: महेश कुमार सस्पेंड
सीबीआई ने अदालत में खुलासा किया कि 1975 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस के अफसर महेश कुमार को सदस्य (इलेक्ट्रीकल) के साथ ही वेस्टर्न रेलवे के महाप्रबंधक का अतिरिक्त चार्ज दिलाने के लिए 12 करोड़ रुपये की डील हुई थी।
इसके तहत दो करोड़ रुपये तत्काल देने थे और 5-5 करोड़ बाद में दो किश्तों में चुकाने की बात हुई थी। दो करोड़ की शुरुआती रकम में से ही 90 लाख रुपये दिए जा रहे थे, जिस दौरान रेल मंत्री पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला की रंगे हाथ गिरफ्तारी हो गई।
इसी दिन मामले में गिरफ्तार रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार को सस्पेंड कर दिया। बंसल ने मामले में खुद की भूमिका से इंकार किया। अदालत ने सिंगला समेत 4 को चार दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा दिया।
5 मई: बंसल की मुसीबत बढ़ी
कांग्रेस और सरकार ने साफ किया कि न बंसल इस्तीफा देंगे और न ही कोयला घोटाले की जांच पर घिरे कानून मंत्री।
मामले में सीबीआई को कुछ ऐसे सुराग हाथ लगे हैं, जिससे रेल मंत्री पवन बंसल की मुसीबत और बढ़ गई।
करीब 2000 फोन कॉल्स की जांच कर रही सीबीआई को पता चला कि रेल मंत्री के भांजे विजय सिंगला और उनके निजी सचिव लगातार संपर्क में थे।
सीबीआई को सिंगला और बंसल के निजी सचिव की फोन पर देर रात तक बातचीत के रिकॉर्ड मिले हैं।
इस बातचीत में पवन बंसल का नाम भी लिया गया। सीबीआई को बंसल के खिलाफ सूबत मिलने के बाद इस बात की जांच शुरू कर दी गई कि सिंगला और उसके गिरोह की पहुंच रेल मंत्रालय में किस हद तक थी।
7 मई: इस्तीफे पर संसद में घमासान
रेल मंत्री पवन बंसल और कानून मंत्री अश्वनी कुमार के इस्तीफे की मांग पर संसद में सियासी घमासान जारी रहा। दोनों मंत्रियों को हटाने की मांग पर अड़ी भाजपा ने दो टूक कह दिया है कि इस्तीफों के बाद ही संसद चल पाएगी।
पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने संसद में गतिरोध के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराते हुए कहा कि सरकार चाहे तो पांच मिनट में मंत्रियों का इस्तीफा ले सकती है और उसके बाद खाद्य सुरक्षा से लेकर भूमि अधिग्रहण जैसे महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा हो सकती है।
9 मई: बैठक में नहीं पहुंचे बंसल
पवन बंसल कैबिनेट की बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे उनकी विदाई की अटकलें तेज हुईं। बंसल के निजी सचिव राहुल भंडारी से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की गई।
सीबीआई ने संकेत दिए कि बंसल से कभी भी पूछताछ हो सकती है। सीबीआई को पक्का भरोसा हुआ कि घूस की रकम रेल मंत्रालय के शीर्ष लोगों तक ही पहुंचाई जानी थी।
बंसल को बर्खास्त करने की मांग पर मैदान में डटी भाजपा ने उनके खिलाफ सुबूतों का पुलिंदा सीबीआई को सौंप दिया है।
पार्टी ने दावा किया कि कि रिश्वत कांड में गिरफ्तार बंसल के भांजे विजय सिंगला के साथ उनके पुत्र अमित कुमार बंसल और भतीजे विक्रम बंसल के कारोबारी रिश्ते हैं।
इसी दिन खबर ऐसी चर्चाओं को बल मिला कि बीच का रास्ता निकालने के लिए कांग्रेस सीबीआई की जांच में घिरते बंसल को छोड़ कर अश्वनी कुमार को बचा सकती है।
ऐसी खबरें मिली की प्रधानमंत्री भी इससे सहमत है कि बंसल से इस्तीफा ले लिया जाए और कानून मंत्री अश्विनी कुमार को कोई दूसरा विभाग सौंप दिया जाए।
10 मई: बंसल की छुट्टी
और आखिर मामला खुलासा होने के एक सप्ताह बाद रेल मंत्री पवन बंसल से इस्तीफा ले लिया गया।
बंसल की विदाई के बाद कांग्रेस अब श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे को रेल मंत्री बना सकती है। खड़गे का नाम कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी शुमार था।