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पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को विफल नहीं होने देगा भारत

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जलवायु परिवर्तन को लेकर अहम मंत्रिस्तरीय वार्ताओं से पहले भारत ने रविवार को कहा कि वह पिछले जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलनों की तरह पेरिस में चल रहे शिखर सम्मेलन को किसी भी हालत में विफल नहीं होने देगा।
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दरअसल, इससे पहले के शिखर सम्मेलनों में राष्ट्रों के झूठे आश्वासन के चलते जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका था।

भारत ने कहा कि वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन के एवज में अमीर देशों की ओर से भुगतान करना सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पहले शनिवार को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार मसौदा को पेश किया गया।
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कई मुद्दे अनसुलझे हुए

इस मसौदे पर आखिरी सहमति बनाने को लेकर 195 देशों के मंत्री विचार-विमर्श करने के एक दिन पहले भारत का यह बयान आया है। वार्ताकारों को भी उम्मीद है कि सम्मेलन के समापन से पहले किसी न किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा।

उच्च स्तरीय बैठक में हिस्सा लेने पेरिस पहुंचे पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नए जलवायु परिवर्तन समझौते पर पहुंचने को लेकर दुनिया के देश बीच रास्ते में हैं।

उन्होंने कहा कि मसौदे में कई मुद्दे अनसुलझे हुए हैं। यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कंवेंशन फॉर क्लाइमेट चेंज को मूलभूत वैश्विक जलवायु संविधान बताते हुए भारत ने भी स्पष्ट किया है कि इसमें किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जावडे़कर ने कहा कि पिछले एक साल से ज्यादा समय के दौरान फ्रांस की ओर से उठाए गए कदमों की तर्ज पर भारत काम करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन वार्ता को विफल नहीं होने देगा।
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