संसद सत्र के आखिरी दिन केंद्र सरकार ह्विसल्ब्लोअर सुरक्षा बिल का रास्ता साफ करने में कामयाब रही।
संसद सत्र के आखिरी दिन केंद्र सरकार ह्विसल्ब्लोअर सुरक्षा बिल का रास्ता साफ करने में कामयाब रही। राज्यसभा ने शुक्रवार को इस बिल को हरी झंडी दे दी। राष्ट्रपति की मुहर के बाद यह बिल ह्विसल्ब्लोअर को सुरक्षा देने वाले कानून की शक्ल अख्तियार कर लेगा।
लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भ्रष्टाचार विरोधी छह बिलों के एजेंडे में यह बिल भी शामिल है। 15वीं लोकसभा के आखिरी सत्र में इस बिल के अलावा कोई भी अन्य बिल पारित नहीं हो सका।
इस बिल पर सरकार खुद कई संशोधनों का प्रस्ताव दे चुकी थी। लेकिन आखिरी वक्त में इन संशोधनों से पीछे हट गई। सरकार अगर संशोधन लाती तो बिल को फिर लोकसभा में पेश करना पड़ता।
यूपीए-2 कम से कम इस बिल को अगली सरकार के भरोसे छोड़ने के पक्ष में नहीं थी। इसलिए सरकार ने संशोधन से पीछे हटकर बिल को कानून में तब्दील करने का रास्ता साफ कर दिया। डीओपीटी राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि चूंकि इस बिल को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी थी इसलिए इसे राज्यसभा से पास कराना जरूरी था।
राहुल गांधी ने सत्र शुरू होने से पहले छह भ्रष्टाचार विरोधी बिल को पास कराने की जिम्मेदारी सरकार को दी थी। लेकिन विपक्ष ने इसे कांग्रेस का चुनावी एजेंडा मानते हुए इस पर सहयोग नहीं करने का संकेत पहले ही दे दिया था।
इस बिल में उन लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने के कड़े प्रावधान हैं जो नौकरशाहों और सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं। इस बिल में अफसरशाहों और कर्मचारियों के खिलाफ झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है।
पूर्व में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जब भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने वाले ह्विसल्ब्लोअर को जान तक से हाथ धोना पड़ा है। इनमें तेल माफिया के खिलाफ आवाज उठाने वाले इंडियन ऑयल के इंजीनियर मंजूनाथ की हत्या काफी चर्चित रही थी।