तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी ओ पनीरसेल्वम को सौंपने के जयललिता के फैसले पर किसी को भी हैरानी नहीं हुई है।
यह जयललिता के लिए पनीरसेल्वम की वफादारी और समर्पण का एक और ईनाम है। 63 साल के पनीरसेल्वम के बारे में कुछ बातें सत्ता के गलियारों में लंबे समय से कही सुनी जाती रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह पनीरसेल्वम ने भी चाय बेची है और उनके पिता भी पार्टी के वफादार थे। पनीरसेल्वम के पिता अन्नाद्रमुक के संस्थापक स्वर्गीय एमजी रामचंद्रन के लिए काम करते थे और एमजीआर तभी से उन पर मेहरबान थे।
यहां तक कि पनीरसेल्वम के भाई आज भी पेरियाकुलम में चाय की दुकान चलाते हैं। हालांकि उनका पारिवारिक पेशा खेतीबाड़ी का है।
पनीरसेल्वम के बारे में ये कहा जाता है कि चाय की दुकान से फुरसत निकालकर उन्होंने ग्रैजुएशन की पढ़ाई की और ये बात एमजीआर को भी पता थी।
पनीरसेल्वम पहली बार शशिकला के रिश्तेदार टीटीके दिनाकरन के जरिए जयललिता की नजर में आए।