तनाव मौजूद हो या नहीं, गुजरात से लगने वाली भारत-पाकिस्तान सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान लगातार कई अजीबोगरीब दुश्मनों से लड़ रहे हैं।
पाकिस्तान इस सीमा पर गोलीबारी तो नहीं करता लेकिन उसकी जगह ‘पानी बम’ चलाकर भारत के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी करता है।
यह ‘बम’ दरअसल उस बाढ़ की शक्ल में साल में कम से कम दो बार छोड़ा जाता है जिसे पाकिस्तान अपनी तरफ बने डैम से चलाता है।
यह बाढ़ क्रीक के नमक भरे पानी को साथ लाकर कच्छ के रण से गुजरने वाली एक मात्र और सामरिक तौर पर अति महत्वपूर्ण सड़क के बड़े भाग को खोखला कर रही है।
यह सड़क रण की सीमा को गुजरात के मुख्य भाग से जोड़ती है जिसके बिना इस इलाके में पहुंचना असंभव है।
इतना ही नहीं यहां का प्रतिकूल मौसम शायद ही कभी 40 डिग्री से नीचे आता है।
नमक की बहुलता वाली धूल भरी आंधी में इस तापमान को झेलने के लिए बीएसएफ ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (आईआईटी) और डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर कूलिंग जैकेट का उपाय निकाला है। एक बार चार्ज होने के बाद यह जैकेट एक जवान को करीब छह घंटे तक राहत दे सकती है।
इसके अलावा इस इलाके में मौजूद जहरीले सांपों की वजह से बीएसएफ जवानों को बंदूक और असलहे के साथ विष को काटने वाली दवाएं (एंटी वीनोम ड्रग) हमेशा साथ रखनी होती हैं।
गांधीनगर फ्रंटियर के महानिरीक्षक (आईजी) एके सिन्हा के मुताबिक उनके एक जवान को वाइपर सांप ने सात बार काटा और उसे एंटी वीनोम की सौ खुराक देनी पड़ी, तब उसकी जान बची।
सिन्हा के मुताबिक यह जहरीले सांप जवानों के जूतों और बैगों में छुप जाते हैं। यह बीएसएफ के ऐसे दुश्मन हैं जिन्हें सीमा पर निर्मित मजबूत कंटीले तारों की फेंसिंग से नहीं रोका जा सकता।
सिन्हा ने बताया कि रण के सूखे इलाके में नमक भरी जमीन पर पक्का निर्माण लंबे समय तक नहीं टिकता। उस पर पाकिस्तान की ओर से छोड़ा जाने वाला पानी इस इलाके की जमीन को बार बार दलदली बना कर सड़क की पक्की बनावट को लगातार कमजोर कर रहा है।
वीकोकोट पोस्ट पर बीएसएफ के साथ अमर उजाला रिपोर्टर ने एक रात गुजारी।
कल्पना से परे मुश्किल भरे हालात में काम कर रही बीएसएफ की चिंता यह है कि अगर सड़क खराब हो गई तो असलहा बारूद तो दूर की बात सीमा पर तैनात जवानों को पीने का पानी तक मुहैया नहीं हो पाएगा। यहां रोजाना पीने के लिए करीब पंद्रह टैंकर पानी लाना पड़ता है।