ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभियोजकों को गोधरा कांड के बाद हुए 2002 के दंगों में दोषी ठहराए गए अपने पूर्व मंत्री मायाबेन कोडनानी और बजरंग दल नेता बाबू बजरंगी के खिलाफ फांसी की सजा पर जोर न देने को कहा था।
हैदराबाद से लोकसभा सांसद ने सवाल उठाया कि दंगों के दौरान लोगों की हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को क्या फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि कोडनानी और बाबू बजरंगी को एक अदालत ने 92 लोगों की हत्या के आरोप में दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अभियोजक दोनों के लिए फांसी की सजा चाहते थे लेकिन तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभियोजकों को कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती नहीं देने को कहा था।
अकसर अपने भड़काऊ बयानों के चलते सुर्खियों में रहने वाले 46 वर्षीय राजनीतिज्ञ ने कहा कि क्या 92 लोगों की हत्याओं के दोषियों को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए।...आखिर फांसी की सजा कब दी जानी चाहिए।